TOXIC HUKUM'S BIWI - Chapter 11
इशानी के राजमहल,
आज इशानी को यूनिवर्सिटी भी जाना है पर इतने दर्द में तो बस हो गया सब । साथ ही आज उसका इंपॉर्टेंट लेक्चर भी हैं और कितने दिन से उसका इंतजार कर रही थी पर लगता नहीं है कि अब वो जा पाएगी । माथे पर भयानक दर्द हो रहा है । गिरी भी था तो बॉडी पर थोड़ा बहुत छिल गया था , लेकिन दर्द तो दर्द ही है न । परंतु वो इस पल में बस लगी पड़ी हुई है ब्रेकफास्ट बनाने में क्योंकि रसोई में उसके अलावा कोई नही है और सुबह के 8 बज चुके है । इस समय पर खाना नही बना तो बस मां तो जैसे बोल - बोल के जान ही ले लेंगी तो, बस वो इसी वजह से अब तेजी से ही मटर कढ़ाई में डालते हुए पुरिया छानने लगती हैं और एक तरफ पर मीठे में खीर । शुक्र है चावल साफ आते है वरना उसका और भी समय बर्बाद हो चुका होता । अब वो खाना बनाते हुए साथ में समय भी देख रही होती है । बार - बार उसकी निगाह ऊपर खड़ी पर ही जा रही होती है कि तभी इशानी की मां किचन में आ जाती हैं और इशानी को पीछे से देखते हुए एक कर्कश आवाज़ में कहती है।
" मैडम को .....इतनी क्या फिक्र हो रही है , की बार - बार टाइम देख रही है ? कही जाना है क्या ?
तो वही इशानी, जिसका पूरा ध्यान सिर्फ पूरियां छानने में लगा था, पर जब मां की आवाज आती है, तब फिर वो उनकी तरफ मुड़ जाती है और तुरंत ही गैस ऑफ करके कहती है ।
" वो मां..…..खाना बन गया है ,बस मुझे यूनिवर्सिटी भी जाना है तो इसीलिए टाइम देख रही हु "।
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