TOXIC HUKUM'S BIWI - Chapter 22
नीचे हॉल में पूरे घर का जमावड़ा लगा हुआ था । वो महल जहां सर्फ वो तीन और नौकर चाकर है आज वहां सुबह - सुबीर ही पूरी भीड़ लगी हुई है जैसे " पूरा कबीला आकर बस गया हो " ।
अब हाल में इशानी की दादी एक तरफ भारी-भरकम गद्दे वाले सिंहासन जैसे सोफे पर बैठी हुई है और उनके दोनों ओर चाचा-चाची, मामा-मामी, मौसी-मौसा और उनके बड़े-बड़े बेटे-बेटियाँ सभी एक साथ है और माहौल में गंभीरता थी । सभी के चेहरे लटके हुए है और कोई कुछ नही बोल रहा है कि तभी मौसी जिनकी बेटी भाग गई है वो फ़फकते हुए ही राधिका जी के साथ एक कमरे से बाहर आ जाती हैं और अपने आंसुओं को पोंछते हुए कहती है।।
"पता नहीं कहाँ चली गई हमारी पायल! न जाने किस हाल ने होगी । ( रोते हुए हु ही ) हमने तो सोचा था कि अच्छे घर में ब्याह देंगे इसका और पूरी जिंदगी आराम से कटेगी उसकी , पर अब तो समाज में कौन सा मुंह दिखाएँगे। अब तो जैसे ही सबको पता लगा है अब लोग हमें दुत्कार रहे है और पायल के पापा तो बस कल से ही अपने कमरे से बाहर नहीं निकल रहे ....
और बस ये कहकर वो जोर - जोर से ही रोने लगती है और वही उनको ऐसे रोते देख दादी जो गुस्से में थी पहले से हु वो अपनी लाठी ज़मीन पर पटक देती हैं और गुर्राते हुए कहती है।
" जब बेटी घर पर थी खोज - खबर नही ले पाई उसकी और अब उसके भागने के बाद रो रही , छी ! छी .....समाज में मुंह दिखाने लायक नही छोड़ा तेरी बेटी ने "।
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