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Chapter 24

TOXIC HUKUM'S BIWI - Chapter 24

ईशानी अभी भी गार्डन में पेड़ के सहारे सिर झुकाए बैठी थी। उसकी सांसें तेज़ चल रही थीं और आंसू ज़मीन पर गिर रहे थे, पर वो रो नहीं रही थीं बल्कि वो खुद को रोक रही थी। लेकिन वो शब्द, वो भद्दे कमेंट्स, वो तस्वीर—सब उसके दिमाग में घूम रहे थे। हां इससे पहले भी उसके साथ बहुत बुरा हो चुका है पर इतना नही । ये सब जो भी हो रहा है वो उसे महसूस कर बस ऐसा लग रहा है कि खुद को खत्म कर ले । कोई टेंशन ही नहीं रहेगी और न ही कोई कुछ बोलने वाला होगा ।

न जाने किसने नजर लगा दिया हैं उसे । वो खुद में , खुद से खुश रहने वाली लड़की अब जीना ही नही चाहती है । अब उसका जी मिचलने सा लगता है। पूरे शरीर और माथे पर दर्द सा होने लगता है जैसे प्राण ही निकल जाएंगे कि तभी कही से तेज हवा का झोंका उसके ऊपर से गुजर जाता है और वो हड़बड़ाए हुए तेज - तेज से हांफते हुए खोल लेती है अपनी आंखे और फिर निहारने लगती है वो  सामने और खुद से कहती है ।

"यह सब किसने किया "

वो किसी भी हाल में इस सवाल का जवाब चाहती थी। पर ये जवाब उसे कहा से मिलेगा । उसे तो पता भी नहीं है ज्यादा लोगों के बारे में और उससे भी बड़ी बात कोई उससे बात क्यों ही करेगा इस इंसीडेंट के बाद । कुछ एक दो को पता चलता तो कुछ बात होती पर यहां पूरी यूनिवर्सिटी में ही किसी खबर की तरह फैल चूका है तो बस वो अब अपना बैग कसकर ही अपने सीने से लगा लेती हैं और उठने ही लगती है कि । तभी अचानक से ही उसका फ़ोन वाइब्रेट होने लगता है। जिससे फिर वो  अनमने ढंग से स्क्रीन को  देखने लगती है जहां पर " —घर से कॉल था। जिसकी वजह वो फिर एक  गहरी सांस लेती है और जैसे ही कॉल उठाती है । तभी दूसरी तरफ सृष्टि की कड़क आवाज़ आती है।

"जल्दी घर आओ! तुम्हारी वजह से पहले ही बहुत तमाशा हो चुका है!"

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