TOXIC HUKUM'S BIWI - Chapter 17
रात अपने गहराई की तरफ बढ़ने लगी थी और इसी के साथ वो कार भी । उस वक्त कार की रफ्तार इतनी तेज़ थी कि इशानी को कुछ भी समझने का मौका नहीं मिला कि उसके साथ आखिर हुआ क्या । उसकी धड़कनें बेतहाशा बढ़ चुकी थीं, और उसका दिमाग सुन्न पड़ चुका था। ठंडी हवा उसके गालों से टकरा रही थी, मगर उसकी सांसें अटक गई थीं। वो समझ नहीं पा रही थी कि ये सब अचानक क्या हो गया... और क्यों? पर जब तक वो ध्यान नहीं देगी उसको आखिर समझ कैसे आएगा तो बस वो फिर अब अपना सर ऊपर कर लेती हैं और सहलाने लगती है अपने हाथो पर क्योंकि जिसने भी पकड़ा था उसके हाथ का दबाव वहां बहुत ज्यादा ही था । जिसकी वजह से वही उसका एक हाथ थोड़ा लाल हो गया था पर गाड़ी तभी हचक्का खाती है और वो " आह" सी आवाज़ निकाल अब सहलाने लगती है अपना सर क्योंकि वो आगे किसी चीज से टकराया। पर जब उसे अपने साइड में कोई महसूस होता है मतलब उसे उंगलियां नज़र आने लगती है जिसमें बड़ी बड़ी अंगूठियां थी । तब फिर उसकी आँखें अब हैरानी के मारे ही चौड़ी सी फैल जाती है और वो जैसे ही खुद को संभालते ...... डबडबाए हुए हाल में अपना पूरा चेहरा ऊपर करती है । तभी उसकी नज़र कार चलाने वाले शख्स पर पड़ जाती हैं वो सकपका जाती है बुरी तरह से और वो कहती है।
"त...तुम?" उसकी आवाज़ झटके से निकली, मगर उसकी घबराहट अभी भी कम नहीं हुई थी।
जिसकी वजह से वही उसके बगल में ड्राइविंग करते हुए वो तुम वाला शख्स यानी विक्रांत जिसके चेहरे पर अजीब-सी ठंडक थी, जैसे उसके लिए ये सब बहुत आम हो। वो कार की स्पीड थोड़ी और तेज कर लेता है और अपनी भूरी आंखों को अब भी आगे रास्ते पर टिकाए हुए कहता है ,
"तुम्हें लगा, मैं तुम्हें इतनी आसानी से जाने दूँगा?" विक्रांत ने बिना उसकी ओर देखे कहा।
जिससे वह इशानी का ये सुनकर तो बस दिल तेज़ी से धड़क उठता है और वो हड़बड़ा के ही तुरंत कार का दरवाज़ा खोलने की कोशिश करने लगती है। परंतु कार तो लॉक थी तो वो जोर - जोर से ही खिड़की पर मारने लगती है और वही विक्रांत उसे ऐसे देख झट से ही उसका एक हाथ पकड़ अब अपना हाथ उसके हाथ पर रख लेता है और कहता है।
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