Chapter 337
तुम mr रघुवंशी नहीं हो. कोई बहरूपिया हो
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2 घंटे बाद… काशी बिस्तर पर लेटी हुई थी, लेकिन उसकी आँखों के सामने वो सारे पल एक साथ गूंज रहे थे, जब विश्व ने उसे जबरदस्ती बनारस में शादी की थी और फिर उसे अपने पास मुंबई लेकर आया था