Chapter 218
काशी और चंचल आमने-सामने
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काशी अपने घर आ गई थी और वो सबके साथ बैठी हुई थी। उसके मौसा जी और मौसी जी उसे देखकर उससे बातें कर रहे थे। काशी उनसे सामान्य रूप से बात तो कर रही थी, लेकिन उसका ध्यान चंचल की ओर था।