Meet Vishwanath Raghuvanshi ( devil)
पुणे के घने और खूंखार जंगल के बीचो-बीच एक आदमी कुर्सी पर राजा की तरह बैठा हुआ था। उसकी उम्र लगभग 30 साल की होगी, 6 फीट हाइट, मस्कुलर बॉडी, बाइसेप्स पर महादेव का टैटू और एक कान में डायमंड का स्टड था। चेहरे पर हल्की दाढ़ी और आँखों में तबाही का मंज़र साफ़ झलकता था। इस शख्स का नाम विश्वनाथ रघुवंशी था, जिसे दुनिया वाले डेविल के नाम से जानती थी।
उसके आस-पास कुछ काले कपड़ों में हथियार लिए आदमी मौजूद थे। कुर्सी पर बैठे आदमी की नीली आँखें उस समय गुस्से से लाल हो गई थीं और उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ नज़र आ रहा था। उसने सफ़ेद रंग की शर्ट पहनी हुई थी जिसके ऊपर के तीन बटन खुले हुए थे, जिससे उसके गले में पहना हुआ रुद्राक्ष साफ़ दिखाई दे रहा था।
वह अपनी गुस्से से लाल आँखों से सामने मौजूद उस शख्स को देख रहा था जो घुटनों के बल बैठा हुआ था और जिसके चेहरे पर हताशा साफ़ दिखाई दे रही थी। मौत का मंज़र उसे अपने आस-पास महसूस हो रहा था। उसने अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए उस आदमी को देखकर कहा,
“डेविल मुझे माफ़ कर दो, डेविल मैं सच में बहुत शर्मिंदा हूँ। मैंने इतने समय से कोशिश की लेकिन मैं कामयाब नहीं हो पाया। पर मैं तुमसे वादा करता हूँ कि मैं जल्दी उसका पता ढूँढ निकालूँगा और तुम्हें ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना होगा। बस मुझे एक मौका और दे दो। बस यह आखिरी मो…”
उस आदमी के मौके के शब्द वहीं पर अधूरे रह गए क्योंकि कुर्सी पर बैठे डेविल ने उस आदमी के सीने पर गोली मार दी थी, जिससे वह वहीं पर मर गया।
डेविल अपनी कुर्सी से खड़ा हुआ और डेविल के खड़े होते ही उसके आस-पास मौजूद सभी आदमी अपना चेहरा नीचे झुका लिए, क्योंकि डेविल को मंज़ूर नहीं था कि कोई उसके सामने सिर उठाकर बात करे।
वह अपने हाथ में पड़ी हुई बंदूक को एक नज़र देखता है और फिर उस आदमी को देखकर गुस्से में दांत पीसते हुए कहता है,
“डेविल की दुनिया में दूसरा मौका नहीं होता है।”
उसके बाद डेविल अपने आदमियों को देखकर कहता है,
“जंगल के अंदर फेंक दो इसे, यह हमारे किसी काम नहीं आया, कम से कम जानवरों की भूख मिटाने के काम तो आएगा।”
दो आदमी आगे आते हैं और उस मरे हुए आदमी को खींचते हुए जंगल के अंदर ले जाते हैं। डेविल वहाँ से बाहर निकला। बाहर उसकी गाड़ी खड़ी थी।
डेविल अपनी गाड़ी चला रहा था। उसने गार्ड्स को अपने साथ नहीं लाया था क्योंकि उसका सिर गुस्से में फट रहा था और उसकी आँखें बहुत ज़्यादा लाल हो गई थीं।
डेविल की गाड़ी पूरी रफ़्तार में चल रही थी और फिर अचानक से हाईवे पर आकर उसने गुस्से में अपनी गाड़ी पर ब्रेक लगा दिया। उसकी साँसें गुस्से में तूफ़ान मार रही थीं और उसकी लाल आँखें किसी राक्षस की तरह प्रतीत हो रही थीं।
उसने कसकर अपनी आँखें बंद कर लीं और स्टीयरिंग व्हील पर दो-तीन बार हाथ मारा और गुस्से में चिल्लाकर कहने लगा,
“नहीं नहीं तुम हर बार मेरे हाथों से बच नहीं सकते हो, देखना एक दिन जब तुम मेरे शिकंजे में होंगे तो तुम्हें ऐसी मौत दूँगा कि तुम मुझसे मौत की भीख मांगोगे पर मैं तुम्हारी ज़िन्दगी मौत से भी बदतर कर दूँगा।”
वह अपने बालों को दोनों मुट्ठियों में कस के पकड़ कर नोचता है और गुस्से में जोर से चिल्लाता है। तभी गाड़ी के डैशबोर्ड पर रखा उसका फ़ोन बजता है। वह फ़ोन उठाकर स्पीकर पर रखता है और कहता है,
“हाँ समीर बोल।”
सामने से समीर कहता है,
“विश्व तू कहाँ है? तुझे पता है यहाँ पर हंगामा हो गया है, गुड़िया ने सारा घर सर पर उठा रखा है, वह किसी के काबू में नहीं आ रही है, तू जल्दी आ।”
वह एक गहरी साँस छोड़ता है और कहता है,
“ठीक है मैं बस थोड़ी देर में पहुँच रहा हूँ, तू तब तक गुड़िया का ख्याल रख।”
समीर “ठीक है” बोलकर फ़ोन रख देता है। समीर उसका बचपन का दोस्त है, जितने अच्छे तरीके से समीर उसे जानता है उतना शायद ही दुनिया में कोई जानता होगा।
विश्व सबसे पहले खुद को शांत करने की कोशिश करता है। वह डैशबोर्ड से अपनी सिगरेट की डिब्बी निकालता है और उसमें से एक सिगरेट को मुँह में लगाते हुए, उसके धुएँ को हवा में उड़ाते हुए खुद को कंट्रोल करने की कोशिश करता है। उसकी नज़र घड़ी पर जा रही थी, जैसे कि वह किसी समय का इंतज़ार कर रहा था। जैसे ही घड़ी के काँटे 3 बजते हैं, वह अपनी गाड़ी में लगा हुआ म्यूज़िक सिस्टम ऑन कर देता है और एक एफएम चैनल लगा देता है।
जैसे ही रेडियो स्टेशन से उसका एफएम चैनल कनेक्ट होता है, उसके कानों में एक आरजे की आवाज़ आती है।
“(दुनिया में हर कोई किसी न किसी की तलाश में भटक रहा है, कोई मंज़िल की तलाश में भटक रहा है तो कोई रास्ते की तलाश में। मेरे चाहने वालों, मेरे दोस्तों, जो रास्ते की तलाश में हैं, मैं दुआ करूँगी कि उन्हें उनकी मंज़िल मिल जाए और जो मंज़िल की तलाश में हैं, उनका यह सफ़र मेरे साथ चलते-चलते हसीन हो जाएगा। शाम की क्वेश्चन माला में मैं आप सबका हमारे इस रेडियो स्टेशन में स्वागत करती हूँ। मेरे प्यारे दोस्तों, मैं हूँ आपकी RJ एंजेल। तो चलिए शुरुआत करते हैं आज की इस खूबसूरत शाम की हमारी सबसे पहले कॉलर के साथ।)”
वह आरजे अपने किसी कॉलर से बात करने लगी और दूसरी तरफ विश्व उसकी आवाज़ को सुनता हुआ गाड़ी चला रहा था। न जाने कब उसका रास्ता उस आरजे के प्रोग्राम के साथ-साथ चलता रहा और कब वह मुंबई पहुँच गया उसे पता ही नहीं चला।
आरजे एंजेल की आवाज़ सुनते-सुनते विश्व का गुस्सा भी कम हो गया था और अब वह बिल्कुल नॉर्मल तरीके से गाड़ी चलाते हुए अपने घर की तरफ़ जा रहा था।
तभी आरजे एंजेल की आवाज़ फिर से आती है,
“वेल दोस्तों, हमारा यह खूबसूरत कारवा आज बस यहीं तक है। उम्मीद करूँगी कि आपको आज का एपिसोड पसंद आया होगा। तो अपनी इस मामूली सी आरजे को इज़ाज़त दीजिये, मैं कल फिर आऊँगी आपके साथ इस खूबसूरत एहसास को लेकर। तब तक के लिए…”
लेकिन इससे पहले कि आरजे अपना आगे का सेंटेंस पूरा कर पाती, विश्व ने झटके से गाड़ी रोकी और घूरते हुए उस म्यूज़िक सिस्टम को देखने लगा। उसने म्यूज़िक सिस्टम देखते हुए कहा,
“नहीं..नहीं..नहीं एंजेल बिना गाना गाए आप नहीं जा सकती हैं। आपको पता है मैं सिर्फ़ आपके प्रोग्राम के लिए और सिर्फ़ आपके गाने के लिए पूरे 24 घंटे इंतज़ार करता हूँ, तो आप अपनी आवाज़ में बिना गाना सुनाए तो यहाँ से नहीं जा सकती हैं।”