काशी की किडनैपिंग - Chapter 3
मुंबई।
रेडियो स्टेशन के बाहर एक ऑटो रूका। उसमें से एक लड़की, गुलाबी सूट-सलवार में, बाहर निकली। वह ऑटो वाले को पैसे दे ही रही थी कि दूसरी लड़की ने उसका हाथ खींच लिया।
"अरे जल्दी चल, शो शुरू होने वाला है, और तू लेट हो गई है," दूसरी लड़की ने कहा, उसे जल्दी से अपने साथ रेडियो स्टेशन के अंदर ले जाते हुए।
ऑटो वाला अपने पैसे के लिए चिल्लाता रहा। तभी एक बॉडीगार्ड उसके पास आया और उसे उसके पैसे दे दिए।
उसने सूट-सलवार पहनी लड़की को रेडियो स्टेशन के अंदर एक कांच के कमरे में ले जाकर बैठा दिया। वह उसके कानों में हेडफोन लगाती है और उसे माइक की तरफ देखने का इशारा करती है।
लड़की ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। एक लाल बटन ऑन करते हुए, उसने मुस्कुराते हुए माइक में कहा, "हेलो मुंबई, मैं हूँ आपकी अपनी RJ एंजेल।"
एक हफ़्ते बाद…
रघुवंशी इंडस्ट्रीज़।
विश्व अपने केबिन में बैठा था। उसके हाथों में एक जलती हुई सिगरेट थी, और आँखें स्क्रीन पर टिकी हुई थीं। वह किसी की तस्वीर देख रहा था, लेकिन जितना वह उसे देख रहा था, उतना ही उसका गुस्सा बढ़ता जा रहा था।
एक्सप्रेस सिगरेट से पूरा एशट्रे भरा हुआ था, लेकिन गुस्सा कम नहीं हो रहा था।
उसने अपने हाथ में जलती हुई सिगरेट की नोक लैपटॉप स्क्रीन पर रख दी। स्क्रीन पर जिस शख्स का चेहरा था, वह जलने लगा।
वैसे तो लैपटॉप की स्क्रीन चल रही थी, लेकिन विश्व को लग रहा था कि उसका चेहरा जल रहा है। वह जलते हुए निगाहों से उस आदमी को देखकर गुस्से में बोला, "तुम छुप सकते हो, लेकिन मर नहीं सकते हो, किशोर अवस्थी।"
"क्योंकि तुम्हारी मौत सिर्फ़ विश्वनाथ रघुवंशी के हाथों लिखी हुई है। 24 साल से तुम्हें ढूँढ रहा हूँ। और मुझे यकीन है कि मेरी तलाश जब खत्म होगी, तब मैं तुम्हें 24 घंटे की ज़िन्दगी भी नहीं दूँगा। तुम्हारी वजह से जितना मैं और मेरी बहन तड़पे हैं, उससे कहीं ज़्यादा तड़प तुम्हें होगी।"
विश्व अपने गुस्से में, स्क्रीन पर जलते हुए आदमी के चेहरे को देखते हुए, यह कह रहा था। उसके चेहरे पर इतना गुस्सा था जो साफ़ दिख रहा था।
उसकी नफ़रत इस बात से साबित हो रही थी कि जिस सिगरेट की आग से वह लैपटॉप की स्क्रीन जला रहा था, वह उसकी उंगलियों को भी जला रही थी। पर शायद गुस्से में उसे यह दर्द महसूस नहीं हो रहा था।
तभी टेबल पर रखा उसका फ़ोन बजा। वह अपना फ़ोन उठाता है और देखता है कि जर्मनी से जो जासूस उसने किशोर अवस्थी को ढूँढने के लिए मंगवाए थे, उनका फ़ोन है।
उसने फ़ोन कान पर लगाते हुए गुस्से में कहा, "अगर अपनी नाकामयाबी के बारे में बताने के लिए फ़ोन किया है, तो तुम्हें मेरे आदमी बता देंगे कि पिछले जितने भी जासूस इस केस में नाकामयाब हुए हैं, उन्हें क्या इनाम दिया गया है?"
सामने से एक जासूस बोला, "वो और होंगे सर जिन्होंने आपसे पैसे लिए होंगे, लेकिन काम पूरा नहीं किया था। मेरी बात अलग है। मैं जर्मनी से यहां पर सिर्फ़ आपके इस एक केस को हैंडल करने के लिए आया हूँ। मेरे बारे में एक बात फ़ेमस है कि मैं किसी भी छोटे-मोटे लोगों का केस नहीं लेता हूँ। इसीलिए जब आपका केस मेरे पास आया, तो मैंने इसे तुरंत सॉल्व करने के लिए हाँ कर दी है।"
"मैं जर्मनी का सबसे फ़ेमस जासूस हूँ, इसलिए नहीं क्योंकि मेरी फ़ीस ज़्यादा है, इसलिए क्योंकि मेरे काम में कमी नहीं होती है। आपको किशोर अवस्थी के बारे में पता करना था। मुझे अभी तक किशोर अवस्थी के बारे में कुछ पता नहीं चला है।"
विश्व ने गुस्से में टेबल पर रखा पेपरवेट उठाया और उसे दीवार पर मारते हुए कहा, "जब तुम्हें किशोर अवस्थी के बारे में पता नहीं चला है, तो मुझे क्या चुटकुले सुनाने के लिए फ़ोन कर रहे हो?"
सामने से जासूस बोला, "नहीं सर, अपना गुस्सा शांत कीजिए। मुझे भले ही किशोर अवस्थी के बारे में पता नहीं चला है, लेकिन उससे जुड़ी हुई एक खबर है मेरे पास।"
विश्व गुस्से में, लेकिन ध्यान से उस जासूस की बात सुन रहा था।
जासूस ने आगे कहा, "किशोर अवस्थी की एक बेटी है, जिसका नाम टिया है। वह मुंबई सांताक्रूज़ कॉलेज में पढ़ती है और एक रेडियो स्टेशन पर RJ है।"
यह सुनते ही विश्व का चेहरा गुस्से में भड़क गया। उसकी आँखों के सामने कुछ दृश्य चलने लगे, लेकिन उसने अपने हाथों की मुट्ठियाँ कसी हुई थीं।
वह गुस्से में बोला, "तुम्हारा काम हो गया है, तुम्हें तुम्हारे पैसे मिल जाएँगे।"
विश्व ने फ़ोन काट दिया और किशोर अवस्थी की आधी जली हुई स्क्रीन पर तस्वीर को देखते हुए कहा, "तुमने 24 साल मुझे और मेरी बहन को जिस दर्द में रखा है किशोर अवस्थी, अब वक़्त आ गया है कि वही दर्द तुम्हें मिले, जब पता चले कि जब कोई अपना तकलीफ़ में होता है, तो कैसा लगता है।"
"मैंने अपनी गुड़िया को इतने सालों तक तड़पते हुए देखा है। पर अब बारी है, उसकी हर तड़प का हिसाब लेने की और तुम्हारे तड़पने की।"
मुंबई की भरी सड़कों के बीच एक गाड़ी तेज़ी से जा रही थी। गाड़ी की बैक सीट पर दो लड़कियाँ बैठी हुई थीं।
एक लड़की ने जीन्स और क्रॉप टॉप पहना हुआ था, और दूसरी ने प्लाज़ो सूट-सलवार।
दोनों के कानों में हेडफ़ोन लगा हुआ था और सामने मोबाइल पर कोई फिल्म चल रही थी। वह दोनों लड़कियाँ उसे देखकर हँस रही थीं, तभी ट्रैफ़िक में गाड़ी रूकी।
जीन्स पहनी लड़की ने दोनों के कानों से हेडफ़ोन निकालते हुए कहा, "यार काशी, तू बिलकुल सही है, किसी से कुछ कहने की टेंशन ही नहीं।"
बगल में बैठी काशी ने अपनी दोस्त टिया को घूर कर देखा। टिया हँसने लगी।
उसके बाद उसने अपना पर्स निकाला और कहा, "अच्छा 1 मिनट रुक, मैं तुझे कुछ दिखाती हूँ।"
लेकिन तभी उसने अपने बैग में अपना पर्स ढूँढने की कोशिश की, तो सिर पर हाथ मारते हुए बोली, "अरे यार! मैं तो अपना पर्स घर ही भूल गई हूँ…"
काशी की आँखें एकदम से बड़ी हो गईं। वह हैरानी से टिया को देखने लगी। टिया जल्दी से ड्राइवर से बोली, "शंभू, गाड़ी यहीं साइड पर लगाओ।"
"जी मैम साहब," कहते हुए शंभू ने गाड़ी साइड पर लगा दी।
काशी हैरानी से टिया को देख रही थी। टिया ने उससे कहा, "काशी, मैं अपना पर्स घर भूल गई हूँ और उसमें मेरा ATM और क्रेडिट कार्ड दोनों हैं। मैं एक काम करती हूँ, यहाँ से टैक्सी लेकर घर वापस जाती हूँ और तू सीधे मॉल पहुँच। मैं पर्स लेकर सीधे मॉल ही पहुँचूँगी।"
काशी की आँखें एकदम से बड़ी हो गईं। उसने सिर ना में हिलाया। वह टिया के हाथों को पकड़कर उसे रोकना चाहती थी, लेकिन टिया तब तक गाड़ी से नीचे उतर गई थी। उसने दरवाज़ा भी बंद कर दिया।
अंदर से काशी शीशे पर हाथ मारते हुए अपना सिर ना में हिला रही थी, लेकिन तभी रेड लाइट ऑन हुई और शंभू गाड़ी स्टार्ट कर देता है।
टिया टैक्सी लेकर वापस घर चली गई और काशी ड्राइवर के साथ मॉल के एंट्रेंस पर पहुँच गई।
शंभू ने काशी से कहा, "मैडम, आपको यहीं उतरना होगा, मुझे गाड़ी पार्किंग में लगानी होगी।"
काशी ने सिर हाँ में हिलाया और धीरे से दरवाज़ा खोलकर बाहर आ गई।
जैसे ही वह बाहर आई, उसके सामने वह बड़ा सा मॉल दिखाई दिया। वह घबरा रही थी। उसने शंभू को आगे जाने का इशारा किया, तो शंभू गाड़ी को पार्किंग की तरफ़ ले गया।
काशी धीरे-धीरे मॉल की तरफ़ अपने कदम बढ़ा रही थी, इस बात से अनजान कि मॉल के दोनों तरफ़ दो ब्लैक स्कॉर्पियो उसकी तरफ़ नज़र रखे हुए थे।
एक की ड्राइविंग सीट पर विश्व बैठा हुआ था और दूसरे पर उसका खास आदमी टोनी।
टोनी ने ब्लूटूथ को विश्व से कनेक्ट करते हुए कहा, "मालिक, यही है वह। उस जासूस ने जो मुझे गाड़ी नंबर दिया था, ये लड़की उसी में से बाहर निकली है।"
सामने से गुज़रती हुई काशी को देखकर विश्व के हाथ उसके स्टेरिंग व्हील पर कस गए। उसने ब्लूटूथ कनेक्ट करते हुए टोनी से कहा, "काम पर लग जाओ, आधे घंटे में मुझे ये लड़की कारखाने में चाहिए।"