Chapter 123
आज मेरा भी व्रत है — चलो, साथ में मंदिर चलते हैं।"
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कलावती चाचा चंचल को लेकर आ चुकी थीं। वैसे तो उनके मन में लड्डू फूट रहे थे जब वो चंचल को लेकर सीढ़ियों से नीचे आ रही थीं, लेकिन बेचारी चंचल इतनी डरी हुई थी कि उसका डर देखकर मेरा ही