Chapter 92
जब तक मेरी शादी ना हो जाए, गलती से भी होश में मत आना।" - Chapter 92
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काशी अखंड के साथ शादी के मंडप पर बैठी थी और शादी की रस्में चल रही थीं। तभी वहाँ अर्थ मौसी को लेकर आया। उसने एक बैग साइड की कुर्सी पर रखा और मौसी से कहा, "मौसी अब बैठिए, मैं किसी को