Chapter 344
"कोई तुमसा नहीं - इश्क़ की दूसरी पारी" - Chapter 344
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दोपहर का वक़्त था। बीती शाम हुई बहस के बाद सुमन और माधव की कोई बात नहीं हुई थी। सुमन उसे नज़रअंदाज़ करते हुए ऑफिस के लिए निकल गई थी। माधव लंच करने के बाद वापिस अपने काम पर आया ही थ