Chapter 321
"कोई तुमसा नहीं - इश्क़ की दूसरी पारी" - Chapter 321
Preview mode only. Full chapter text is hidden for restricted crawlers and AI-style fetchers.
"तुम कहती हो तो मान लेते हैं कि तुम्हारे मन में उन्हें लेकर कोई एहसास नहीं, पर इस बात को तो तुम भी नहीं झुठला सकतीं कि आज भी वो तुम्हारे लिए मायने रखते हैं। कोई रिश्ता नहीं तुम्हार