तेरे इश्क में बेकाबू - Chapter 209(happy ending)
अगली सुबह जब सूरज उगा, तो इंदौर की हवाओं में एक नया सवेरा था। शेखावत मेंशन के सामने काले रंग की गाड़ियों का काफिला आकर रुका।
गाड़ी से अध्यांश और अंशिका उतरे। हॉल में दादाजी, अनीता जी ऊपर के कमरे से सोनल अपनी नन्हीं बेटी को लिए नीचे आ चुकी थीं। अनु, विधान, आकाश, ध्रुव और सागर सभी वहाँ मौजूद थे। जब पूरे परिवार ने अध्यांश को सही-सलामत अपनी आँखों के सामने देखा, तो पूरे मेंशन में खुशियों के आंसू छलक पड़े।
दादाजी ने आगे बढ़कर अपने पोते को गले से लगा लिया, "मुझे पता था... मेरा 'ब्लैक डेविल' इतनी आसानी से हार नहीं मान सकता।"
अध्यांश ने मुस्कुराकर अंशिका का हाथ थामा और पूरे परिवार के सामने देखा। जो साम्राज्य कल तक बिखरने की कगार पर था, आज वह और भी ज्यादा मजबूत और अटूट होकर खड़ा था।
सूर्यवंशी मेंशन की तबाही और आलोक-मिस्टर खान के अंत को बीते पूरे नौ महीने हो चुके थे। इस दौरान इंदौर शहर ने एक नई करवट ली थी। शेखावत साम्राज्य अब पहले से कहीं ज़्यादा सुरक्षित और मजबूत हो चुका था, क्योंकि 'ब्लैक डेविल' अध्यांश शेखावत ने अपने दुश्मनों की बची-कुची जड़ों को भी उखाड़ फेंका था।
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