तेरे इश्क में बेकाबू - Chapter 201
सूर्यवंशी मेंशन के ठंडे फर्श पर बैठी अंशिका की चीखें अब सिसकियों में बदल चुकी थीं। उसके आंसुओं से फर्श की संगमरमर टाइल्स भीग रही थीं। आलोक जी और मिस्टर खान की वो क्रूर हंसी उसके कानों में पिघले हुए शीशे की तरह उतर रही थी। लेकिन उस खौफ के बीच भी, अंशिका के भीतर का विश्वास मरा नहीं था।
"वो वापस आएंगे..." अंशिका ने अपने आंसुओं को पोंछते हुए तड़पकर अपनी नजरें उठाईं। उसकी आंखों में अब दर्द की जगह एक अजीब सी आक्रामकता थी।
"पापा, आप उस इंसान को नहीं जानते। वो ब्लैक डेविल है। मौत भी उसके सामने आने से पहले उसका रास्ता बदल लेती है। अगर मेरे आदि को एक खरोंच भी आई ना... तो इस आलीशान मेंशन की ईंट से ईंट बज जाएगी!"
"खामोश!" आलोक जी ने दहाड़ते हुए अपना हाथ हवा में उठाया। "बहुत हुआ तुम्हारा यह आशिकाना नाटक! वो शेखावत अब तक किसी गहरी खाई में लाश बन चुका होगा। मिस्टर खान, अब वक्त बर्बाद करने का कोई फायदा नहीं है। शेखावत के शेयर्स और उसके अंडरवर्ल्ड के ठिकानों को टेकओवर करने की कागजी कार्रवाई शुरू की जाए।"
मिस्टर खान ने अपने फोन को देखा और एक गहरी सांस लेकर मुस्कुराए, "बिल्कुल सूर्यवंशी। बस मुझे मेरे आदमियों के फोन का इंतजार है, जो उस पहाड़ी से शेखावत की मौत की आखिरी पुख्ता खबर लेकर आने वाले हैं।"
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