तेरे इश्क में बेकाबू - Chapter 202
शेखावत मेंशन का विशाल हॉल आज किसी श्मशान सा खामोश था। दादाजी, और अनीता जी के चेहरों पर जो गहरी निराशा थी, वह शब्दों से परे थी।
ऋषभ, ऋषिका और शिवांश, सभी कोने में बेहद उदास और सहमे हुए बैठे थे। बड़ों के चेहरों पर छाई इस मुर्दनी ने बच्चों को भी डरा दिया था। कोई कुछ बोल नहीं रहा था, पर सबका दिल बस एक ही दुआ मांग रहा था कि यह खबर झूठी साबित हो जाए।
मनाली ने बच्चों ऋषभ, ऋषिका और शिवांश की उदासी को देखते हुए उन्हें ऊपर के कमरे में भेज दिया था, ताकि इस मातम की काली छाया उनकी मासूमियत को न छू ले।
लेकिन इस भारी मातम और चीखते सन्नाटे से दूर, मेंशन के ऊपर के कमरे में एक अलग ही दुनिया थी। वह सोनल का कमरा था।
सोनल की डिलीवरी को आज पूरे दस दिन हो चुके थे। उसने एक बेहद प्यारी, मासूम सी नन्ही बेटी को जन्म दिया था। घर में इतनी बड़ी खुशियाँ आई थीं, लेकिन किस्मत का खेल देखिए कि उन खुशियों को मनाने का मौका तक नसीब नहीं हुआ।
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