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Chapter 200

तेरे इश्क में बेकाबू - Chapter 200

सूर्यवंशी मेंशन... के मेन दरवाजे पर एक महंगी ब्लैक रंग की गाड़ी आकर रुकी। गाड़ी का दरवाजा खुला और अंशिका उदास कदमों से बाहर निकली।

मेंशन का वो विशाल सफेद ढांचा आज उसे किसी महल जैसा नहीं, बल्कि एक आलीशान पिंजरे जैसा लग रहा था। बचपन में जिस घर की चहारदीवारी उसे महफूज लगती थी, आज वहां कदम रखते ही उसकी रूह कांप रही थी। उसने एक गहरी सांस ली, अपने आंसुओं को पोंछा, और खुद को मजबूत करके हॉल की तरफ बढ़ी।

जैसे ही अंशिका ने विशाल हॉल के भीतर कदम रखा, सामने का नजारा देखकर उसके पैर वहीं ठिठक गए।

विशाल सोफे पर आलोक जी पूरी शान-ओ-शौकत से बैठे थे। उनके चेहरे पर एक ऐसी विजयी मुस्कान थी, जिसे देखकर ही अंशिका का दिल किसी अनहोनी की आशंका से धड़क उठा। उनके ठीक बगल में सौरभ बैठा था और वेदिका भी बैठी हुई थी, आलोक जी ने सभी को यहां पर इकट्ठा किया हुआ था। लेकिन उनके चेहरों पर छाई खामोशी और डर कुछ और ही बयां कर रहे थे।

अंशिका सौरभ की तरफ बड़ी और उसने हैरानी से कहा, भाई आप आप जिंदा है।

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