तेरे इश्क में बेकाबू - Chapter 207
रात की काली चादर सूर्यवंशी मेंशन को अपनी गिरफ्त में लिए हुए थी। कमरे के अंदर का सन्नाटा इतना गहरा था। कि अंशिका की तेज़ होती धड़कनें भी सुनाई दे रही थीं। अध्यांश, जो मौत के मुहाने से लौटकर आया था, आज फिर मौत की तरफ ही जाने के लिए तैयार था।
अंशिका के कांपते हाथों के बीच अध्यांश ने अपनी कहानी के वो पन्ने खोले, जिन्हें आज तक दुनिया से छिपाया गया था। उसने धीरे से कहा, "मैंने टाइगर को अपनी मदद के लिए बुलाया था। उस हादसे के बाद, जब आर्यांश ने मुझे मारने की कोशिश की, तो मैं उसे चाहता तो वहीं खत्म कर सकता था। पर मैंने उसे दूसरी जिंदगी दी। यह सोचकर कि शायद वह एक बार फिर गलत रास्ते को न चुने। लेकिन आर्यांश ने जिन लोगों पर भरोसा किया, वो किसी के होने लायक नहीं हैं।"
अध्यांश के साथ आर्यांश भी जिंदा था और अध्यांश ने आर्यांश को भी बचा लिया था। लेकिन वह इस वक्त हॉस्पिटल में था क्योंकि उसका ट्रीटमेंट चल रहा था। और उसे होश भी आ चुका था। अध्यांश उससे मिलने के बाद ही अपने मिशन के लिए निकला था।
आर्यांश ने जो भी अध्यांश के साथ किया था। उसकी उसने माफी मांगी थी। और अध्यांश ने उसे बड़े दिल के साथ माफ कर दिया था। क्योंकि वह जानता था यह सब कुछ उसने अपनी मर्जी से नहीं बल्कि सौरभ और आलोक जी के कहने पर किया था।
अध्यांश की आँखों में दर्द और कड़वाहट दोनों थे। "मैं जिंदा हूँ या मर गया, यह सच किसी को नहीं पता था। मेरे घरवाले, ध्रुव, सागर, आकाश, यहाँ तक कि अनु भी... किसी को भी नहीं। सिर्फ टाइगर यह बात जानता था, क्योंकि मुझे अपनी मौत का नाटक रचे बिना इन दरिंदों की जड़ें काटनी थीं।"
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