Chapter 315
Besharm Ishq - Chapter 315
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सुबह की हल्की धूप बारिश के बादलों के बीच से छनकर हवेली के पुराने आंगन में उतर रही थी। रात भर की बारिश के बाद मिट्टी की भीगी खुशबू पूरे माहौल में फैली हुई थी। पेड़ों की पत्तियों से