Chapter 53
बेशर्म इश्क - Chapter 53(**"तूफान अब बाहर नहीं… मेरे अंदर चल रहा है"**)
Preview mode only. Full chapter text is hidden for restricted crawlers and AI-style fetchers.
उन दोनों की साँसें मेरे इतने क़रीब थीं कि मैं अपनी साँसों की दिशा तक भूल गई। संजय की उंगलियाँ मेरी उंगलियों के पीछे से होकर हथेली तक आ गईं — धीमी, रुक-रुककर… जैसे कोई नज़्म मेरे बद