Chapter 25
बेशर्म इश्क - Chapter 25 ( सेठ जी और भी अंदर)
Preview mode only. Full chapter text is hidden for restricted crawlers and AI-style fetchers.
सुबह-सुबह जब मैं बंगले पहुँची, तो दरवाज़ा फिर **सेठ भरतदास** ने ही खोला। आज उसके चेहरे पर कुछ अलग था — एक अजीब सी **शांति**, लेकिन आँखों में वही **पुरानी गर्मी**। मैंने इधर-उधर देख