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Chapter 65

बेशर्म इश्क - Chapter 65(### **रात और जवाँ हो रही थी…** )

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--- ### **रात और जवाँ हो रही थी…** कमरे की दीवारों पर लहराती परछाइयाँ अब और गहरी हो चली थीं। खिड़की से आती चांदनी अब बिस्तर तक पहुँचने लगी थी — जैसे खुद चाँद भी इस लम्हे का गवाह बन

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