Chapter 44
बेशर्म इश्क - Chapter 44(“तू अब अजनबी नहीं लगता")
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**स्थान: वही पुराना मोहल्ला – आधी रात के बाद – खामोशी में डूबी छत** चाँद अब सीधा चारपाई पर पड़ा था। वो छत, जो दिन में कपड़े सुखाने की जगह थी, अब रात के सबसे निजी पल की गवाह बन चुकी