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Chapter 398

तुम मेरी मिस्ट्रेस हो

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अवनी इस समय विवेक के रूम में थी। विवेक इस वक्त सोया हुआ था। उसे देख कर अवनी का चेहरा आंसुओं से भर गया था । वह धीरे से विवेक के पास आती है, कि तभी बाथरूम का दरवाजा खुलता है और उसमें

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