Chapter 48
तुम ख्वाहिश नहीं जरूरत हो
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कशिश की बात सुनकर आदि के तन-बदन में आग लग गई। उसने गुस्से में कशिश को घूरते हुए देखा और अपनी सख़्त आवाज़ में कहा, “अपनी बकवास बंद करो। मैंने ऐसा कभी नहीं चाहा था। हाँ, मैं मानता हूँ