Chapter 87
मेरा क्या फायदा है? मुझे क्या मिलेगा?"
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कशिश धीरे से सिर हिलाती है। अब उसकी नजरें नक्ष से मिलीं, और इसी के साथ उसके पूरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई, क्योंकि नक्ष की ये निगाहें वैसी नहीं थीं जैसी उसे नज़र आया करती थीं।