Chapter 394
इस मजबूरी को अपनी किस्मत मान लो
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ज्योति ध्रुव के सामने बैठ कर गाना गा रही थी और ध्रुव घूरते हुए ज्योति को देख रहा था उसने कस के अपनी आंखें बंद की और इरिटेट होता हुआ कहता है , “ ज्योति गाना गाना बंद करो और इस सिचुए