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Chapter 303

अलविदा आस्तिक रायचंद.. अब मैं तुम्हारे हाथों की कठपुतली नहीं हूं।”

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अरुणिमा बेड पर किसी तकिया की तरह सिकुड़ कर बैठी हुई थी। अरुणिमा को बेड पर रखकर आस्तिक सीधे अलमारी की तरफ जाता है। और वहां से फर्स्ट एड बॉक्स लेकर आता है। वह बॉक्स लाकर बेड के साइड

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