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Chapter 289

उस मनहूस रात को मैं कैसे भूल सकती हूं।

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जैसे ही आस्तिक की नींद खुली, वह कसमसा कर उठा लेकिन अपने शरीर पर एक भार होने की वजह से वह ठीक से उठ नहीं पाया। आस्तिक अपनी आँखें मलते हुए, उन्हें खोलकर देखता है तो उसकी आँखें हैरानी

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