Chapter 338
प्यार तो पत्थर दिल जैसे इंसान को भी पिघला देता है तो फिर कृष किस खेत की मूली है
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मनस्वी तो वहां से जा चुकी थी, लेकिन बाकी सब वहीं बैठे हुए थे। उसके जाने के बाद धानी ने गुस्से में कृष की तरफ देखा, जो बेफिक्रे के साथ बैठा हुआ था। वो गुस्से में अपने मन में सोच रही