सुहागरात - Chapter 1
कमरे का दरवाज़ा खुला और धानी, मेहँदी लगे पैरों के साथ, कमरे में दाखिल हुई। पूरा कमरा फूलों और मोमबत्तियों से सजा हुआ था। आज धानी की सुहागरात थी।
वह कमरे में धीरे-धीरे चली। उसने अपना लहँगा दोनों हाथों से पकड़ा हुआ था। धीरे-धीरे चलते हुए वह बेड के पास आई।
बेड चारों तरफ़ से फूलों से सजाया गया था। बीच में लाल गुलाब की पंखुड़ियों से एक दिल बनाया गया था। पूरे कमरे में जलने वाली खुशबूदार कैंडल्स माहौल को और खूबसूरत बना रही थीं।
धानी के चेहरे पर हल्की शर्म की मुस्कान थी। वह मुस्कुराते हुए पूरे कमरे को देख रही थी। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी ज़िन्दगी में यह दिन आएगा। वह भी कभी दुल्हन बनेगी और इस तरह उसकी सुहागरात होगी।
बचपन से अनाथ आश्रम में पली धानी, आज शहर के सबसे बड़े रईस खानदान, मालवीय खानदान की बहू थी। लेकिन एक हफ़्ते पहले तक उसे इस बात का अंदाज़ा तक नहीं था कि उसकी ज़िन्दगी अचानक कैसे बदल जाएगी, और न ही उसे एहसास था कि उसके आने वाले ज़िन्दगी में क्या होने वाला है।
शर्म से लिपटी धानी अपने आप को आईने में देख रही थी। काली आँखें, जो इस वक़्त काजल से भरी हुई थीं। हल्के गुलाबी होंठ, जिन पर लाली लगी हुई थी। दुल्हन के श्रृंगार से तैयार धानी अपने पति का इंतज़ार कर रही थी।
तभी अचानक कमरे के दरवाज़े पर आहट हुई। धानी की धड़कनें बढ़ गईं और वह जल्दी से अपने दुपट्टे को संभालते हुए दरवाज़े की तरफ़ देखती है, इस उम्मीद से कि दरवाज़े पर उसका पति खड़ा होगा।
लेकिन उसके चेहरे पर जो चमक थी, वह हल्की मायूसी में बदल गई जब दरवाज़े पर एक मेड, हाथों में दूध का गिलास लिए, खड़ी थी।
"मैडम, बड़े साहब ने यह दूध कमरे में रखने के लिए कहा है! मैं इसे कहाँ रखूँ?" मेड ने धानी को देखते हुए कहा।
धानी घबरा गई। वह इधर-उधर देखती है और फिर मेड से कहती है,
"कहीं भी रख दीजिए, जहाँ आपको जगह मिले।"
मेड मुस्कुराते हुए सिर हिलाती है और अंदर जाकर दूध को बेड के पास रखे साइड टेबल पर रख देती है।
मेड वहाँ से जाने ही वाली थी कि दरवाज़े पर पहुँचते ही धानी कहती है,
"सुनो..."
मेड के कदम रुक जाते हैं और वह पलट कर धानी को देखकर कहती है,
"जी मैडम, कहिए, आपको कुछ चाहिए क्या...?"
धानी शर्म से अपनी पलकें झुका लेती है और हल्की आवाज़ में, दुपट्टे को हल्का सा चेहरे की तरफ़ करते हुए कहती है,
"ये कब तक आएंगे?"
मेड के चेहरे पर हल्की घबराहट आ जाती है। उसने जल्दी से अपना चेहरा नीचे करते हुए उदासीनता से कहा,
"साहब कब तक आएंगे? यह बात तो खुद बड़े साहब भी नहीं बता सकते, तो फिर हम कहाँ से बताएँगे? लेकिन मैं आपके भले के लिए ही कह रही हूँ मैडम, आप साहब का इंतज़ार मत कीजिए। आपके कपड़े काफी भारी हैं, बदलकर आराम कर लीजिए। और अगर कुछ चाहिए तो आप इस बेल को दबा दीजिएगा। यह बेल सीधे मेरे कमरे में जाती है। बेल की आवाज़ सुनकर मैं आ जाऊँगी।" यह बोलकर मेड वहाँ से चली जाती है।
लेकिन धानी हैरानी से उसे जाते हुए देखती रह जाती है। क्या मतलब था उसके कहने का कि आज रात उसका पति घर नहीं आएगा?
मेड ने उसे सलाह दी थी कि वह कपड़े बदलकर आराम कर ले, लेकिन धानी कमरे में खड़ी असमंजस में इस सब के बारे में सोच रही थी।
उसने धीरे से अपने दुपट्टे को दोनों हाथों से पकड़ा और आईने के सामने चली गई। वह दुल्हन की तरह तैयार खड़ी थी। गले में मंगलसूत्र, मांग में सिंदूर और हाथों में भरी हुई चूड़ियों के साथ, उसने लहँगा पहन रखा था। यह श्रृंगार उसने अपनी शादी के लिए किया था और शादी के बाद वह अपने पति के साथ पहली बार अकेले में वक़्त गुज़ारने वाली थी। ऐसे में क्या उसे यह श्रृंगार उतार देना चाहिए...?
नहीं, नहीं। बिना अपने पति को दिखाए वह श्रृंगार कैसे उतार सकती है? यही सोचते हुए धानी ने दुपट्टे को दोबारा सिर पर सही से ओढ़ लिया और बेड के किनारे पर बैठ जाती है।
उसने पूरे कमरे को देखना शुरू किया। सारे कमरे में ऐसे सामान रखे गए थे जो ब्लैक लवर को दर्शाते थे। वहाँ पर पेंटिंग से लेकर स्टैचू तक, सब ब्लैक और ग्रे कलर में था। इतना काला रंग किसी को कैसे पसंद आ सकता है?
अगर सजावट को हटा दिया जाए, तो उस कमरे में रखी हर एक चीज कालेपन को दर्शा रही थी।
धानी बेड के किनारे बैठे हुए कमरे को देख रही थी। वह वैसे भी काफी थक गई थी। पिछले एक हफ़्ते से उसकी ज़िन्दगी बिल्कुल पेंडुलम की तरह इधर-उधर झूल रही थी और आखिरकार अब जाकर उसे सुकून मिल रहा था।
शांति से बैठे हुए कमरे में उसकी नज़र सिर्फ़ दरवाज़े पर थी और वह एकटक लगाए हुए वहाँ से अपने पति के आने का इंतज़ार कर रही थी। सिर पर इतना भारी दुपट्टा और उसके ऊपर से इतना हैवी लहँगा, सारे दिन की भाग-दौड़ के बाद वह काफी थक गई थी।
धीरे-धीरे उसकी आँखें बंद होने लगीं और उसे नींद आने लगी। बेड के सिरहाने पर सिर टिकाते हुए वह हल्की नींद में सो गई।
इतनी थकान के बाद वह चैन की नींद ले रही थी, तभी एक तेज आवाज़ के साथ दरवाज़ा खुल गया। धानी डर गई, लेकिन दरवाज़े पर खड़े शख्स को देखकर धानी की धड़कनें बढ़ गईं और चेहरे पर हल्की घबराहट आ गई।
वह अपनी जगह पर खड़ी हो गई और दोनों हाथों से दुपट्टे को सामने की तरफ़ करते हुए अपना चेहरा नीचे झुका लिया। उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि अपना चेहरा उठाकर सामने देख सके।
दरवाज़े पर खड़ा शख्स कमरे में दाखिल हुआ। उसके चेहरे पर गुस्सा और आँखों में भड़कती हुई ज्वाला थी। कमरे में आते ही उसने अपने बालों पर हाथ फेरा और सीधे क्लोज़ेट की तरफ़ चला गया।
इस वक़्त उसने शेरवानी पहन रखी थी। क्लोज़ेट में जाकर वह अपने कपड़े निकालने लगा।
धानी देखती रही कि वह नॉर्मल कपड़े ढूँढ रहा है। शायद जैसे धानी लहँगे में अनकंफरटेबल है, उसी तरह शायद उसका पति भी शेरवानी में अनकंफरटेबल है। इसीलिए वह अपने पहनने के लिए कंफर्टेबल कपड़े देख रहा था।
उसने देखा कि उसके पति ने एक नॉर्मल शर्ट और ट्राउज़र लिया और सीधे बाथरूम की तरफ़ चला गया। धानी उसे जाते हुए देखती रह गई।
दस मिनट बाद जब वह बाथरूम से वापस आया, तो उसने कपड़े बदल दिए थे और फिर वह शीशे के सामने जाकर अपने बाल सेट करने लगा।
धानी हैरान हो गई। इतनी रात को कपड़े बदलकर बाल सेट कर रहा है, इन्हें तो सोना ही है ना, तो फिर बाल बनाने की क्या ज़रूरत है? पूछूँगी तो कहीं गुस्सा न हो जाए...!
आईने के सामने खड़ा धानी का पति अपने बाल सेट कर रहा था, तभी उसके सामने एक दूध का गिलास आ गया। उसकी आँखें तीखी हो गईं और वह घूरते हुए उस गिलास को देखने लगा।
उसने अपना चेहरा घुमाकर देखा तो अपने हाथों में दूध का गिलास लिए हुए धानी खड़ी थी।
वह धीरे से उस गिलास को अपने पति की तरफ़ बढ़ाते हुए कहती है,
"दूध पी लीजिए।"
उस आदमी के हाथ कंघी पर कस गए और उसने उसे ड्रेसिंग टेबल पर फेंक दिया। ऐसा करने पर धानी घबरा गई। उसके कदम अपने आप पीछे की तरफ़ हो गए और वह डरते हुए अपने पति को देखने लगी, लेकिन जब उसने अपने पति की गुस्से से लाल आँखें देखीं, तो उसने अपना चेहरा जल्दी से नीचे कर लिया क्योंकि वह इन आँखों से आँखें मिलाकर बात नहीं कर पा रही थी।
उस आदमी ने गुस्से में धानी से कहा,
"कौन हो तुम...? 🤨"
धानी हक्की-बक्की रह गई। वह हैरानी से अपना चेहरा उठाती है और अपने पति को देखकर कहती है,
"जी, यह आप क्या कह रहे हैं? यह मैं हूँ, आज ही आपसे शादी हुई है, मैं आपकी पत्नी हूँ।"
धानी की बात सुनकर उस आदमी को इतना गुस्सा आया कि अगले ही पल वह धानी की बाज़ू को कस के पकड़ लेता है। धानी का चेहरा अचानक डर से भर गया। उस आदमी ने इतनी कस कर उसके बाज़ू को पकड़ा हुआ था कि धानी को लग रहा था कि उसका हाथ उसके शरीर से अलग हो जाएगा।