Trapped Marriage Ch. 3

ज़ेन और धानी का रिश्ता - Chapter 3

Posted by unicorngirl ✔️ • Apr 28, 2025 10:20 PM

फ्लैशबैक..

एक हफ़्ते पहले, धानी अनाथ आश्रम के काम में लगी हुई थी। आज इस अनाथ आश्रम में 50वीं सालगिराह का उत्सव मनाया जा रहा था। इसी खुशी में सभी बच्चों ने एक छोटा सा कार्यक्रम आयोजित किया था।

धानी भी आयोजन में शामिल थी। वह बच्चों के साथ स्टेज की तैयारी कर रही थी, तभी उसकी नज़र आश्रम की हैड मैडम, प्रमिला जी पर पड़ी।

उनके चेहरे पर थोड़ी परेशानी थी। धानी उनके पास जाती हुई कहती है,

"क्या बात है बड़ी मैडम? आप इतनी परेशान क्यों हैं? आपके चेहरे पर खुशी क्यों नहीं है? अनाथ आश्रम को 50 साल हो गए हैं। आज तो कितनी बड़ी खुशी का दिन है, देखिए बच्चों ने कितना प्यारा स्टेज तैयार किया है।"

धानी की मुस्कान देखकर प्रमिला जी के चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है।

वह धानी के चेहरे को देखते हुए मुस्कुरा उठती हैं। आखिर धानी है ही इतनी प्यारी। उसकी बातों में इतनी प्यारी मिठास है, जिसे सुनकर कोई भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सकता।

प्रमिला जी भी हाँ में सिर हिलाती हैं और कहती हैं,

"हाँ धानी, तुम सही कह रही हो और सच में बहुत खुशी का दिन है, लेकिन इस खुशी को हम अकेले कैसे सेलिब्रेट कर सकते हैं? इस अनाथ आश्रम के जो मालिक हैं, वे यहाँ के मुख्य अतिथि हैं।"

"हम लोगों ने उनके ऑफिस में जाकर उन्हें निमंत्रण पत्र दिया था और उनसे यह भी कहा था कि बच्चे एक बार उनसे मिलना चाहते हैं, पर देखो इतना समय हो गया है, वे अब तक नहीं आए हैं और न ही उनके आने की कोई खबर आई है। मुझे नहीं लगता कि वे आएंगे।"

प्रमिला मैडम की बात सुनकर धानी थोड़ी हैरान और परेशान हो जाती है। उसने फिर कुछ सोचते हुए कहा,

"मैडम, मैं यहाँ बचपन से हूँ! एक तरह से देखा जाए तो यह अनाथ आश्रम ही मेरा घर है। आज मेरे घर में इतना बड़ा फंक्शन है, मैं इसे अधूरा नहीं छोड़ना चाहती हूँ।"

"जब मैं छोटी सी थी, तब मैंने उन्हें देखा था, जिन्होंने यह आश्रम बनवाया था, तब वे थोड़े जवान दिखते थे, लेकिन अब तो उनकी उम्र काफ़ी हो गई होगी ना।"

प्रमिला मैडम हँसते हुए कहती हैं,

"हाँ, अब उनकी उम्र 55 साल हो गई है। उनका 27 साल का एक पोता भी है। उनके बेटे की मौत कुछ साल पहले एक प्लेन क्रैश में हो गई थी और उनकी बहू तो सालों पहले ही उनके पोते को जन्म देते हुए गुज़र गई।"

"इस अनाथ आश्रम के ओनर मिस्टर उत्कर्ष मालवीय, इस शहर में उनका नाम और रुतबा आज भी वैसा ही है, जैसा सालों पहले हुआ करता था और वह भी सिर्फ़ उनके पोते की वजह से। अपने खानदान के नाम को कभी भी झुकने नहीं दिया। लेकिन इतने बड़े बिज़नेस होने के कारण, वे लोग कभी भी किसी सोशल गेदरिंग में नहीं जा पाते हैं।"

"अब आज का ही देख लो! यह अनाथ आश्रम उनके डोनेशन का एक छोटा सा अंश है! वे इतने बड़े लोग हैं, हमारे जैसे छोटे अनाथ आश्रम में क्यों आएंगे?"

धानी खड़ी होती है और अपने दोनों हाथों को कमर पर रखते हुए कहती है,

"क्यों नहीं आएंगे? छोटा है तो क्या हुआ, इस अनाथ आश्रम में पूरे 250 बच्चे हैं और इन 250 बच्चों की उम्मीद है कि वे लोग हमारे मुख्य अतिथि से मिलेंगे।"

"आप फ़िक्र मत कीजिए। मैं उन्हें यहाँ लेकर आऊँगी। वे जितने भी बड़े इंसान होंगे और बहुत बिज़ी भी रहे होंगे, लेकिन इन बच्चों के लिए उन्हें अपने बिज़ी शेड्यूल में से 5 मिनट निकालना ही होगा। आप मुझे उनका पता दीजिए। कहाँ है उनका ऑफिस? मैं उन्हें यहाँ लेकर आऊँगी।"

प्रमिला मैडम धानी की बात सुनकर हँसने लगती हैं, लेकिन उन्हें धानी पर विश्वास था। इसलिए उन्होंने धानी को मालवीय इंडस्ट्री का पता दे दिया। धानी ऑटो लेकर सीधे मालवीय इंडस्ट्री पहुँच जाती है।

इतनी बड़ी कंपनी को देखकर धानी को घबराहट होने लगती है। उसने वहाँ पर कॉन्फिडेंस होकर कह तो दिया था, लेकिन इतनी बड़ी कंपनी में वह एक इंसान को कैसे ढूँढेगी?

फिर उसने अपने ही सिर पर हाथ मारते हुए कहा,

"पागल हो गई है धानी, जिसे ढूँढने आई है, उसे ढूँढने के बारे में सोच रही है। मिस्टर उत्कर्ष मालवीय, इस कंपनी के मालिक हैं। उन्हें ढूँढना कौन सा मुश्किल काम होगा, जाकर बस पूछना है कि वे कहाँ मिलेंगे! उन्हें तो सब जानते हैं, Wow धानी तू कितनी स्मार्ट है।"

खुद को ही प्राउड करते हुए धानी वहाँ से एंट्रेंस की तरफ चली जाती है। वह देखती है कि लिफ़्ट आने में अभी समय है और वहाँ पर बहुत सारे लोग हैं, जो लिफ़्ट का इंतज़ार कर रहे हैं।

धानी भी लिफ़्ट के पास जाकर खड़ी हो जाती है। वह देखती है कि लिफ़्ट के दूसरी तरफ़ दो लड़कियाँ खड़ी हैं, जिन्होंने बहुत ही अतरंगी या फिर यूँ कहें कि रिवीलिंग कपड़े पहने हुए थे।

पीछे की तरफ़ जो चार आदमी खड़े हैं, वे शायद इस कंपनी में ही काम करते हैं, क्योंकि उन्होंने फ़ॉर्मल कपड़े पहने हुए हैं और उनके गले में जो आई कार्ड है, उस पर मालवीय का लोगो लगा हुआ है।

लेकिन उन सबके आगे एक बुज़ुर्ग आदमी सफ़ारी सूट में खड़ा हुआ था। उसकी आँखों पर मोटा चश्मा था और वह छड़ी के सहारे खड़ा हुआ था।

धानी उस बुज़ुर्ग आदमी को हैरानी से देख रही थी। ऐसा लग रहा था कि उसने पहले कभी उन्हें देखा हुआ है, लेकिन उसे याद नहीं आ रहा था।

उस बुज़ुर्ग ने जब धानी की तरफ़ देखा और खुद को देखते पाया, तो उसने एक हल्की सी मुस्कान धानी को दी और बदले में धानी भी मुस्कुरा देती है।

वह दोनों लड़कियाँ, जिन्होंने छोटे कपड़े पहने हुए थे, आपस में बात कर रही थीं।

धानी ने जब उनकी बात सुनी, तो थोड़ी हैरान हो गई। कैसी सोच है आजकल की लड़कियों की? एक लड़की, जिसने रेड कलर की ड्रेस पहन रखी थी, अपनी दोस्त से कहती है,

"अरे यार, इस कंपनी में एंट्रेंस करने का मेरा कब से सपना था। अब जाकर मौका मिला है, तुम्हें क्या लगता है, क्या हमारा लक लग सकता है?"

दूसरी लड़की भी एक्साइटेड होते हुए कहती है,

"अरे अगर वह हमें सामने से नहीं देखेगा, तो क्या हो गया। इस कंपनी में एंट्री मिल गई है ना, उसके केबिन में भी एंट्री मिल जाएगी और उसके बाद उसके बेड पर भी एंट्री मिल जाएगी।"

धानी हैरानी से उनकी बात सुन रही थी। वह बुज़ुर्ग आदमी भी उनकी बात सुन रहा था और बाकी सारे एम्प्लॉयी थोड़े हैरान हो रहे थे। शायद आज उन सबका इस कंपनी में पहला दिन था।

रेड ड्रेस वाली लड़की ने कहा,

"मैंने सुना है कि उसका केबिन टॉप फ़्लोर पर है। एक काम करना, जब हम लोग एंट्रेंस में मीटिंग हॉल में बिज़ी रहेंगे, तब तुम सबका ध्यान अपनी तरफ़ खींच लेना, ताकि मैं पीछे से निकलकर उसके केबिन में जा सकूँ।"

दूसरी वाली लड़की कहती है,

"तुम क्यों पहले जाओगी? मैं पहले जाऊँगी ना। इतने हैंडसम इंसान से मिलने का मौका, मैं तुम्हें पहले क्यों दूँगी? मैं पहले जाऊँगी। मुझे देखते ही वह मुझ पर फ़िदा हो जाएगा। जैन माय लव। तुम्हें पता है, मैं उसे इंस्टाग्राम पर फ़ॉलो करती हूँ और उसकी फ़िटनेस को देखकर तो मैं खुद अपनी डाइट भूल जाती हूँ।"

"उसको रात को सपने में देख-देख कर मैं अपनी आहें भरती हूँ, उसी के लिए तो मैंने बिज़नेस जॉइन किया है। वरना मुझे तो मॉडलिंग करनी थी।"

बुज़ुर्ग आदमी के चेहरे पर एक तिरछी मुस्कान आ जाती है।

लेकिन धानी उनकी बातें सुनकर अजीब तरीके से उन्हें देख रही थी। कैसी पागल लड़कियाँ हैं? ऐसे खुलेआम कैसी गंदी बातें कर रही हैं!

तभी लिफ़्ट आ जाती है और लिफ़्ट का दरवाज़ा खुलता है। लिफ़्ट में पहले से ही तीन लोग मौजूद थे। सारे लोग लिफ़्ट में एंटर हो जाते हैं।

धानी भी लिफ़्ट के अंदर चली जाती है। बुज़ुर्ग आदमी सबको जाने देता है और उसके बाद सबसे लास्ट में लिफ़्ट में एंटर होता है, लेकिन तभी लिफ़्ट ओवरलोड का सिग्नल देती है।

सब लोग हैरानी से एक-दूसरे को देखने लगते हैं। अब लिफ़्ट से बाहर कौन जाए? वह दोनों लड़कियाँ बुज़ुर्ग आदमी को देखकर कहती हैं,

"ओल्ड मैन, तुम निकलो यहाँ से।"

धानी हैरान हो जाती है और हैरानी से उन लड़कियों को देखती है, जो उस बुज़ुर्ग को लिफ़्ट से बाहर जाने के लिए कह रही थीं।

वह बुज़ुर्ग आदमी कहता है,

"बेटा, तुम लड़कियाँ तो जवान हो ना, सीढ़ियों से जा सकती हो। तुम्हें नहीं लगता कि लिफ़्ट ऐसे इंसान के लिए होती है, जिन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती हो।"

बुज़ुर्ग आदमी की बात सुनकर वह दोनों लड़कियाँ नाराज़ हो जाती हैं।

उनमें से रेड ड्रेस वाली गुस्से में कहती है,

"यू ओल्ड मैन! तुम जानते हो हम कौन हैं? हम इस कंपनी की होने वाली मालकिन हैं और तुम हमसे ऐसी बात कर रहे हो। ज़्यादा बकवास की ना, तो लिफ़्ट से धक्के मारकर बाहर निकाल देंगे।"

दूसरी वाली भी गुस्से में कहती है,

"और नहीं तो क्या? एक पैर क़ब्र में है और तुम्हें यह घूमने-फिरने की पड़ी है? पता नहीं यह बुड्ढा यहाँ पर आया ही क्यों है? इस ऑफ़िस में क्या काम है? इस उम्र में क्या करेंगे? हाँ, झाड़ू-पोछा का काम, इसे बहुत अच्छे से मिल जाएगा। तुम देख क्या रही हो? बोलने से क्या होता है, इसे धक्के देकर यहाँ से बाहर ही निकाल दो।"

रेड ड्रेस वाली के चेहरे पर एक डेविल स्माइल आ गई और उसने कहा,

"बिल्कुल ठीक कहा तुमने, इसे तो यहाँ से बाहर ही निकालना चाहिए। इसी की वजह से लिफ़्ट भारी हो रही है। शरीर में जान नहीं है, लेकिन फिर भी लिफ़्ट रोके हुए खड़ा है।"

उस लड़की ने बुज़ुर्ग आदमी के बाजू को पकड़ा और उसे धक्का देने ही वाली थी कि तभी धानी ने उसका हाथ पकड़ लिया और गुस्से में उसके हाथ को पीछे की तरफ़ धकेल दिया!

वह लड़की संभल नहीं पाती है और पीछे लिफ़्ट से लग जाती है।

बुज़ुर्ग आदमी हैरानी से धानी को देखता रह जाता है और वहाँ सभी लोग खड़े हैरानी से बस तमाशा ही देख रहे थे।

धानी गुस्से में उनकी तरफ़ देखती है और कहती है,

"ज़ुबान बताती है कि परवरिश घटिया ही हुई है।"

वह लड़की गुस्से में धानी के ऊपर चिल्लाते हुए कहती है,

"हाउ डेयर यू.."

धानी गुस्से से उसे घूरते हुए कहती है,

"डेयर तो तुमने अभी तक देखा ही नहीं है। अगर दिखाने पर आ गई ना, तो राधा रानी की कसम इतनी जोर से थप्पड़ लगाऊँगी कि दो बार टप्पा खाकर जमीन से लगोगी।"

वह लड़की गुस्से में धानी की तरफ़ देखकर उसे उंगली दिखाती है और कहती है,

"तुम्हारी दो टके की लैंग्वेज से पता चल रहा है कि तुम कितनी घटिया लड़की हो।"

लेकिन धानी ने अगले ही पल उसकी उंगली को अपने हाथों में पकड़ लिया और अगले ही पल उसकी कलाई पकड़कर मरोड़ कर, उसके कमर से लगा दिया।

वह लड़की चिल्लाती रह गई और उसकी दोस्त तो हक्की-बक्की खड़ी थी। उसकी आँखें एकदम बड़ी हो गई और वह घूरते हुए धानी को देखने लगी। धानी ने उसे उसकी दोस्त के ऊपर धकेल दिया और वह दोनों लड़कियाँ लिफ़्ट की दीवार से जाकर लग जाती हैं।

धानी गुस्से में उन्हें देखकर कहती है,

"ज़बान तो अच्छी है नहीं, कम से कम नियत तो अच्छी रखो। यह तो देख लो किसके सामने क्या कह रही हो? इनकी उम्र का तो लिहाज करो। ये उम्र में तुमसे कितने बड़े हैं और जहाँ तक मुझे लगता है, कोई भी माँ-बाप अपने बच्चों को इतना तो सिखाते ही हैं कि अपने बड़ों की इज़्ज़त करनी चाहिए।"

"और क्या कह रही थी तुम, कि यह बुड्ढा आदमी यहाँ पर झाड़ू-पोछा का काम करेगा? चलो इनमें इतनी तो काबिलियत होगी कि यह यहाँ पर साफ़-सफ़ाई के काम कर सकते हैं, लेकिन तुम्हारा क्या? क्या सोचकर तुम खुद को इस कंपनी की मालकिन बता रही थी? मालकिन छोड़ो, तुम तो यहाँ की नौकर बनने लायक भी नहीं हो। यहाँ की नौकरों में भी बहुत तमीज़ होती होगी।"

"मुझे नहीं पता कि तुम दोनों कौन हो और यहाँ किस इरादे से आई हो, लेकिन इतना ज़रूर जानती हूँ कि तुम्हारे इरादे तुम्हारे ख़यालों में ही अच्छे लगते हैं। असल ज़िंदगी में ना तो वे पूरे होंगे और ना ही तुम कामयाब होगी।"

धानी उन लड़कियों से लड़ ही रही थी कि तभी वहाँ पर ब्लैक कपड़ों में कुछ लोग आ जाते हैं।

वे लिफ़्ट के दरवाज़े पर खड़े हो जाते हैं और बुज़ुर्ग आदमी को देखते हुए कहते हैं,

"अरे बड़े साहब आप यहाँ पर? यहाँ से क्यों जा रहे हैं? यह तो पब्लिक लिफ़्ट है, वीआईपी लिफ़्ट उस तरफ़ है।"

ब्लैक कपड़ों में खड़े बॉडीगार्ड उस बुज़ुर्ग आदमी को लिफ़्ट से बाहर निकालते हैं। वह आदमी मुस्कुराते हुए एक नज़र धानी को देखता है और फिर वहाँ से चला जाता है।

सब लोग हैरानी से उसे जाता हुआ देखते रह जाते हैं। यहाँ तक कि धानी भी हैरान हो गई थी। कौन था यह आदमी और उसे लेने के लिए इस तरीके से यूनिफ़ॉर्म में लोग कैसे आ सकते हैं?

तभी लिफ़्ट बंद हो जाती है और ऊपर वाले फ़्लोर पर जाने लगती है। दोनों लड़कियाँ गुस्से में धानी को देख रही थीं, तो धानी भी उन्हें गुस्से में घूरकर देखती है, तभी एक फ़्लोर आता है और वहाँ पर कुछ लोग उतर जाते हैं, जिनमें वे लड़कियाँ भी शामिल थीं। उसके बाद लिफ़्ट सीधे प्रेसिडेंट फ़्लोर आता है।

धानी प्रेसिडेंट फ़्लोर पर जाती है और वहाँ पर मौजूद रिसेप्शन पर खड़ी लड़की से कहती है,

"हेलो, मेरा नाम धानी है। मैं मालवीय अनाथ आश्रम से आई हूँ, मुझे मिस्टर उत्कर्ष मालवीय से मिलना है।"

उस लड़की ने धानी को देखते हुए कहा,

"आपका कोई अपॉइंटमेंट है मैडम?"

धानी कुछ सोचती है और फिर ना में सिर हिलाते हुए कहती है,

"नहीं, मेरा अपॉइंटमेंट तो नहीं है, लेकिन मैं जिस अनाथ आश्रम से आई हूँ, वह अनाथ आश्रम मालवीय ट्रस्ट के अंडर ही आता है।"

रिसेप्शन पर खड़ी लड़की मुस्कुराते हुए कहती है,

"जी मैडम, आप सही कह रही हैं, लेकिन हमारी कंपनी के ट्रस्ट में ऐसे बहुत सारे अनाथ आश्रम, एनजीओ और संस्थाएँ आती हैं। अब हम हर किसी को तो बॉस से मिलने की परमिशन नहीं दे सकते ना। वे इस समय बहुत बिज़ी हैं।"

"वैसे भी कंपनी के सीईओ अभी बाहर गए हैं एक मीटिंग के लिए। इसीलिए सारी कंपनी की ज़िम्मेदारी बिग बॉस पर आ गई है। उनके पास समय नहीं है, प्लीज़ अगर आपको उनसे मिलना है, तो आप अपॉइंटमेंट लेकर आइए। हम ऐसे आपको उनसे मिलने की परमिशन नहीं दे सकते हैं और इस पूरे महीने तो उनका कोई भी शेड्यूल खाली नहीं है। आप चाहे तो अगले महीने का अपॉइंटमेंट, मैं आपको दे सकती हूँ।"

रिसेप्शनिस्ट की बात सुनकर धानी हैरान हो जाती है और सोचने लगती है। अगले महीने का अपॉइंटमेंट लेकर वह क्या करेगी? उसे तो आज ही उत्कर्ष मालवीय से मिलना है।

यही सोचते हुए वह इधर-उधर टहल रही थी, तभी उसे खाली सोफ़ा नज़र आता है और वह रिसेप्शन से कहती है,

"क्या मैं वहाँ बैठ सकती हूँ?"

रिसेप्शन मुस्कुराते हुए हाँ में अपना सिर हिलाती है और धानी वहीं पर लगे सोफ़े पर बैठ जाती है। वह सोचने लगती है कि उसे आगे क्या करना चाहिए?

तभी वहाँ पर कुछ ब्लैक कपड़ों में लोग आते हैं। धानी देखती है, इन्होंने बिल्कुल वैसे ही कपड़े पहने हुए हैं, जैसा कि अभी थोड़ी देर पहले लिफ़्ट के बाहर उन बॉडीगार्ड ने पहने हुए थे।

वे लोग धानी को देखते हैं और कहते हैं,

"एक्सक्यूज़ मी मैडम, बिग बॉस आपसे मिलना चाहते हैं।"

धानी हैरानी से उन लोगों को देखती है और फिर सोचने लगती है। बिग बॉस मतलब कौन? मिस्टर उत्कर्ष मालवीय क्या? वे धानी से मिलना चाहते हैं। लगता है उन्हें पता चल गया है कि धानी अनाथ आश्रम से आई है। इसीलिए वे उनसे मिलना चाहते हैं।

धानी मुस्कुराते हुए हाँ में अपना सिर हिलाती है और कहती है,

"हाँ हाँ बिल्कुल, मैं खुद उनसे मिलना चाहती हूँ, चलिए चलिए।"

यह कहते हुए धानी उन सारे बॉडीगार्ड से पहले ही वहाँ से निकल जाती है। वे सब लोग हैरानी से एक-दूसरे को देखते हैं और फिर धानी के पीछे-पीछे जाने लगते हैं।

कैबिन के दरवाज़े पर पहुँचकर धानी गहरी साँस छोड़ती है और केबिन के दरवाज़े पर नॉक करती है। अंदर से एक आदमी की आवाज़ आती है, जो धानी को अंदर बुला रहा था।

धानी मुस्कुराते हुए केबिन में जाती है, तो देखती है कि विंडो के पास एक आदमी सफ़ारी सूट में खड़ा है, जिसका चेहरा विंडो की खिड़की की तरफ़ था।

धानी कमरे के अंदर दाखिल होती है और दरवाज़े के पास खड़े होते हुए कहती है,

"नमस्ते सर, मेरा नाम धानी है। मैं मालवीय अनाथ आश्रम से आई हूँ। आपको तो शायद अपना बनाया हुआ आश्रम याद भी नहीं होगा, लेकिन वह आपके ट्रस्ट के अंडर ही आता है।"

"और मैं उस अनाथ आश्रम में रहने वाली और काम करने वाली एक एम्प्लॉयी हूँ। दरअसल मैं यहाँ पर आपको इनवाइट करने आई हूँ। वैसे तो हमारी बड़ी मैडम ने आपको खुद इनवाइट किया था।"

"आज हमारे अनाथ आश्रम का 50 साल पूरा हो गया है और उसकी खुशी में बच्चों ने एक छोटा सा फंक्शन रखा हुआ है। मुझे पता है आप बहुत बड़े इंसान हैं, आपके पास इन सब चीज़ों के लिए समय नहीं है, लेकिन अगर फिर भी आप सिर्फ़ 5 मिनट के लिए वहाँ पर आ जाते, तो उन बच्चों का मन बहल जाता।"

"आप इतने समय से उस अनाथ आश्रम की देखभाल कर रहे हैं। वहाँ पर बच्चों को कोई परेशानी नहीं होती है। समय पर हर चीज़ मिल जाती है, खाना, कपड़ा, त्योहार पर खिलौने, सब चीज़ वहाँ पर आपके द्वारा समय पर भेजी जाती है। लेकिन फिर भी लोगों को एक उम्मीद रहती है कि जिसके नाम पर यह अनाथ आश्रम है, एक बार बस उन्हें देख लें। क्या आप उन बच्चों की खुशी के लिए 5 मिनट के लिए अनाथ आश्रम आ सकते हैं?"

"क्यों नहीं, मैं तो कब से इसी चीज़ का इंतज़ार कर रहा हूँ।" वह बुज़ुर्ग आदमी बोलता है और धानी जब उसे देखती है, तो एकदम से उसकी आँखें हैरानी से बड़ी हो जाती हैं।

यह शख्स कोई और नहीं बल्कि लिफ़्ट में मौजूद वह बुज़ुर्ग इंसान ही था, जिनके लिए धानी उन लड़कियों से लड़ी थी।

धानी अपने दोनों हाथों से ताली बजाते हुए खुद से ही कहती है,

"औ तेरी के.. अंकल आप? आप यहाँ क्या कर रहे हैं?"

सफ़ारी सूट में सिंपल पर्सनालिटी के साथ इस वक़्त कोई और नहीं बल्कि इस कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर यानी के मिस्टर उत्कर्ष मालवीय हैं और उत्कर्ष मालवीय कोई और नहीं बल्कि ज़ेन के दादाजी हैं।

दादाजी ने मुस्कुराते हुए धानी को देखा और कहा,

"अरे, मैं तुम्हारे इनविटेशन के बारे में सोच रहा हूँ। अभी तुमने मुझे अपने अनाथ आश्रम इनवाइट किया है ना, बस वही सोच रहा हूँ कि वहाँ जाने के लिए कपड़े बदलने चाहिए या यही कपड़े चलेंगे।"

दादाजी के कहने पर धानी एकदम हैरान हो जाती है और अब उसे समझ आता है कि दरअसल वह इंसान कोई और नहीं बल्कि उत्कर्ष मालवीय हैं, जिन्हें वह लेने आई थी।

अपनी बेवकूफ़ी पर अब धानी को गुस्सा आ रहा था और वह हल्के अफ़सोस के साथ कहती है,

"सॉरी, मुझे लगा आप कोई और हैं। मुझे नहीं मालूम था कि आप ही वह हैं। वरना मैं ऐसी हरकत कभी नहीं करती।"

उत्कर्ष मालवीय उसकी बात सुनकर बोले,

"क्या तुमने कुछ भी नहीं किया है जो सही है, तुमने वही किया है और सही को सही करने के लिए तुम्हें किसी से माफ़ी माँगने की ज़रूरत नहीं है। क्या नाम बताया तुमने अपना, धानी? हाँ, धानी। मैं तुमसे पूछ रहा था। बच्चे, क्या ये कपड़े सही हैं या मुझे दूसरे कपड़े बदलने चाहिए? अगर बच्चों ने मुझे इन कपड़ों में देखा तो कहीं वे घबरा तो नहीं जाएँगे?"

धानी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ जाती है। इतना बड़ा आदमी लेकिन पर्सनालिटी बिल्कुल सिंपल।

वह ना में सिर हिलाती है और कहती है,

"जी नहीं, आप जैसे हैं, वैसे ही बहुत अच्छे लग रहे हैं। आपको कपड़े बदलने की ज़रूरत नहीं है।"

आधे घंटे बाद…

दादाजी अनाथ आश्रम के ग्राउंड में बैठे हुए थे, जहाँ पर फंक्शन चल रहा था। छोटे-छोटे बच्चे दादा जी के स्वागत के लिए गीत गा रहे थे और सब लोग बहुत खुश थे, क्योंकि इतने सालों में पहली बार दादाजी अनाथ आश्रम आए थे।

प्रमिला जी धानी को देखकर मुस्कुरा उठती हैं। जो काम उनके इतनी रिक्वेस्ट करने के बावजूद भी नहीं हो पाया था, क्योंकि कभी भी उन्हें दादाजी से मिलने की परमिशन ही नहीं मिलती थी। वे हमेशा से ही रिसेप्शनिस्ट पर ही निमंत्रण देकर आ जाया करती थीं, पर शायद वह निमंत्रण कभी दादाजी तक पहुँचा ही नहीं।

लेकिन आज धानी दादा जी को अपने साथ लेकर आई थी, यह देखकर प्रमिला मैडम बहुत खुश होती हैं। सिक्योरिटीज़ ने वहाँ पर हर इंतज़ाम कर दिए थे। दादाजी की सुरक्षा के लिए उन्होंने पूरे अनाथ आश्रम को अपने अंडर ले लिया था और छोटे-छोटे बच्चे स्टेज पर परफ़ॉर्म कर रहे थे।

दादाजी यह देखकर बहुत खुश हो रहे थे, क्योंकि स्टेज के पीछे से धानी उन बच्चों की मदद कर रही थी। राधा-कृष्ण से लेकर राम-लक्ष्मण और सीता वनवास तक का प्यारा सा एक दृश्य मंच पर दिखाया जा रहा था।

दादाजी उस दृश्य को तो अच्छी तरह देख रहे थे, लेकिन साथ ही वे बीच-बीच में नज़र आने वाली धानी की मेहनत को देख रहे थे। आज तक वे कितने चैरिटी प्रोग्राम में गए थे, कितने इवेंट में गए थे। वहाँ पर लड़कियाँ छोटे-छोटे कपड़े पहनकर अश्लील गानों पर डांस किया करती थीं, लेकिन अनाथ आश्रम में बच्चों ने भक्ति और ईश्वर से जुड़े हुए प्रोग्राम दिखाए थे।

यह देखकर दादाजी बहुत खुश हुए। जब प्रोग्राम ख़त्म हो गया, तो दादाजी ने सभी बच्चों को तोहफ़े देकर उनका प्रोत्साहन बढ़ाया।

प्रोग्राम ख़त्म हो गया था। प्रमिला मैडम दादाजी के पास खड़ी थी और उनके आने का धन्यवाद कर रही थी,

"आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सर, आप हमारे मामूली से प्रोग्राम में शामिल हुए हैं।"

दादाजी हँसते हुए कहते हैं,

"मैडम जी, अगर आपको धन्यवाद कहना है, तो धानी का कीजिए, अगर वह मुझे यहाँ नहीं लाती, तो शायद मुझे पता ही नहीं चलता कि 50 साल हो गए हैं इस अनाथ आश्रम को बनाए हुए और कितने बच्चों ने इसी अनाथ आश्रम से अपने जीवन में आगे बढ़ाया है।"

"आपको अनाथ आश्रम के लिए किसी चीज़ की ज़रूरत हो, तो आप मेरे सेक्रेटरी से कह सकती हैं। आपको वह चीज़ मुहैया करवा दी जाएगी।"

लेकिन तभी दादाजी की नज़र धानी पर जाती है, जो बच्चों को लड्डू बाँट रही थी।

दादाजी बड़े गौर से धानी को देखते हैं और फिर उन्होंने प्रमिला मैडम से कहा,

"प्रमिला जी, आप बता सकती हैं कि धानी यहाँ पर कब से है?"

प्रमिला मैडम उनकी बात सुनकर थोड़ी हैरान होती हैं, लेकिन फिर उन्होंने कहा,

"धानी, वह तो यहाँ पर बचपन से ही है, शायद वह तीन या चार महीने की रही होगी, तब उसे कोई हमारे पालने में छोड़ गया। बस तब से ही धानी इस अनाथ आश्रम में ही है और वह इसी अनाथ आश्रम को अपना घर कहती है। इतना तो यह अनाथ आश्रम हमारा अपना भी नहीं है, जितना उसने अपना बना लिया है। बहुत प्यारी बच्ची है, बहुत मासूम है। इसे न तो छल-कपट करना आता है और न ही दिखावा करना आता है, जैसी है वैसी ही दिखती है।"

"ऐसी ही तो चाहिए।" दादाजी ने धीरे से कहा, तो प्रमिला मैडम हैरानी से कहती हैं,

"जी, मैं कुछ समझी नहीं, आप कहना क्या चाहते हैं सर?"

दादाजी एक हल्की मुस्कान के साथ प्रमिला मैडम को देखकर कहते हैं,

"प्रमिला जी, यह अनाथ आश्रम धानी का घर है और धानी के लिए यहाँ के लोग ही यहाँ का परिवार है, तो इस नाते शायद आप धानी के परिवार का हिस्सा हुईं, तो इसलिए मैं घुमा-फिराकर बात नहीं करूँगा, मैं धानी को अपने घर की बहू बनाना चाहता हूँ। मैं उसकी शादी अपने पोते ज़ेन के साथ करवाना चाहता हूँ, क्या आपको यह रिश्ता मंज़ूर है?"

प्रमिला मैडम यह सुनकर पूरी तरह से शॉक हो जाती हैं। उन्हें समझ ही नहीं आया, वे इस बात का क्या जवाब दें? क्या वे इस बात के लिए हाँ कहें या फिर ना कहें? क्योंकि धानी के लिए रिश्ता आया भी तो कहाँ से। सीधे मालवीय खानदान से, जिनका नाम इस पूरे शहर में बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है।

उन्हें तो खुद ही नहीं पता कि उनके कितने अनाथ आश्रम और हैं इस शहर में और बिज़नेस में तो उनका नाम हमेशा ही नंबर वन की पोजीशन पर ही रहा है। ऐसे में ज़ेन मालवीय के साथ धानी जैसी अनाथ लड़की की शादी के बारे में सोचकर प्रमिला मैडम हैरानी से कहती हैं,

"सर, यह आप क्या कह रहे हैं? कहाँ आपका पोता और कहाँ धानी?"

100%