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Chapter 226

"तलब तेरे प्यार की" - Chapter 226

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अचानक किसी ने वीर के कान को पकड़कर कसकर मरोड़ दिया। बेचारे वीर के मुँह से दर्द भरी आह निकल गई। दोनों ने घबराकर सर घुमाकर देखा; सामने दादी माँ खड़ी थीं, जो काफ़ी गुस्से में लग रही थ

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