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Chapter 160

"तलब तेरे प्यार की" - Chapter 160

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आयशा यह सोच रही थी कि दादी को कंचन से इतना नाराज़ कैसे किया जाए कि वे उसे वीर की ज़िंदगी से निकाल दें। अचानक उसकी नज़र सीढ़ियों के पास रखे दिए पर पड़ी और उसकी आँखों में चमक आ गई। ल

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