Chapter 158
"तलब तेरे प्यार की" - Chapter 158
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दादी कंचन से खासे नाराज़ लग रही थीं। कंचन के साथ-साथ बाकी सब ने मंदिर की ओर निगाहें घुमाईं। मंदिर की हालत अस्त-व्यस्त थी। सारे फल बिना धुले एक तरफ़ रखे हुए थे। फूलों से चौकी सजाई ग