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Chapter 225

"तलब तेरे प्यार की" - Chapter 225

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एक नज़र सुभद्रा जी को देखने के बाद वीर ने अपनी निगाहें कंचन पर टिका दीं। दादी माँ ने कंचन की आँखों से बहते आँसू देखे, तो तड़पते हुए बोलीं, "वीर, आप ऐसा कह भी कैसे सकते हैं?" वीर ने

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