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Chapter 137

"तलब तेरे प्यार की" - Chapter 137

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शाम का वक्त था। कंचन अपने कमरे में थी और वीरा अपने खिलौनों से खेल रही थी। उसके कमरे का गेट खुला था। विमला अंदर आ गई। कंचन वीरा को देख रही थी, अपनी ही सोच में गुम थी। उसने ध्यान नही

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