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Chapter 104

Gangster love story ( दर्द से मोहब्बत तक का सफर) - Chapter 104

सार्थक से सच्चाई जाने के बाद मिराज एक पछतावे की अग्नि में जल रहा था, उसे इस बात पर इतना धक्का लगा था कि उसने जिस भाई के लिए क्या कुछ नहीं किया था वो असल में एक घटिया इंसान बन जाएगा, उसने तो कभी भी ये नहीं सोचा था कि वो उस इंसान का बेटा है जिसे वो पसंद नहीं करता था उसने तो उसे बस अपनी माँ का बेटा ओर अपना छोटा भाई सोचा था, ओर उसकी एक बहन भी है जिसके बारे में उसे खबर तक नहीं थी, उसे यही सोच कर घबराहट हो रही थी कि उसकी बहन ने जाने क्या क्या नहीं सहा होगा, ओर शिवा ओर बाकि सब ने किस तरह से उसका ख्याल रखा होगा,  उसे अब अपनी बहन अपने पास चाहिए थी,  मिराज उस दिन से खुद मे बदलाव करने लगा था, उसने माया जो उसके साथ रहती थी या यह कह सकते हैं कि मिराज ने उसे अपने साथ जबरदस्ती रखा था उसे भी आजाद कर दिया था, ओर उसके आगे के भविष्य के लिए सभी इंतजार करे उसे इंडिया से बाहर भेज दिया था, जिससे वो भी खुश थी वो तो यही चाहती थी लेकिन मिराज ने उसे एक कैदी की तरह रखा था लेकिन अब वो आजाद थी, 

उसके बाद से ही मिराज भी गोवा इवेंट के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहा था, जिसमे उसकी टिम भी पूरा साथ दे रही थी, ओर उसी टिम में थी नैना,,नैना शर्मा जो कुछ सालो से मिराज के ही आफ़िस में काम करती थी, नैना एक मिडिल क्लास परिवार से थी,  कुछ समय पहले ही उसके पिता हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, उसके घर में वो उसकी एक छोटी बहन ओर माँ ही रहते थे, परिवार की जिम्मेदारी के लिए नैना ने मिराज के आफिस मे काम शुरू कर दिया था, लेकिन काम के दौरान दौरान जब भी वो मिराज से मिलती अक्सर मिराज के गुस्से से घबरा जाती इस लिए वो उससे दूर रहने की कोशिश करती, लेकिन जाने अंजाने वो मिराज से टकराही जाती, जिससे मिराज अक्सर नैना को उल्टा सीधा सुना देता, जिससे नैना भी मिराज को कुछ खास पसंद नहीं करती थी, लेकिन एक दिन जब नैना की माँ की तबीयत ख़राब हो गई तब मिराज ने उस दोरान नैना की बहुत मदद करी थी, उसके घर की खराब हालत को देखकर मिराज ने उसे कुछ पैसे दिए थे जिसे लेने से उसने मना कर दिया था,  तब मिराज ने नैना को अपना अस्सटेंट बना लिया था जिससे उसे सैलेरी भी अच्छी मिले ओर उसके घर के हालात भी सुधर जाए, ओर इस बीच कब नैना मिराज के इस साइड से धीरे धीरे प्यार करने लगी ये उसे भी नहीं पता था, लेकिन उसने अपना प्यार अपने तब ही रखा था, क्योंकि वो मिराज को जानती थी वो किस तरह का इंसान था लेकिन फिर भी वो उसे पसंद करती थी, उसे ये भी पता था की उसका प्यार एक तरफा है, ओर उसमे ओर मिराज में जमीन आसमान का फर्क है,  इसलिए वो मिराज से सिर्फ काम से सम्बन्धी ही बात करती थी, 

तो वही थे दो भाई जो थे अपनी ही कशमकश में, कार्तिक ओर मयंक, जिनके दिल में बहुत कुछ था लेकिन किसी के सामने जाहिर नहीं होने दे रहे थे,

शिवा ओर शिवांगी दोनों गोवा के लिए निकल गए थे,जाने से पहले शिवा ने सार्थक ओर बाकि सब को कई हिदायते दे डाली थी,  क्योंकि उसे पता था वो कितने बड़े खुराफाती है,

शिवा ओर शिवांगी गाड़ी में बिल्कुल खामोश बैठे थे,  शिवांगी खिडकी से बाहर अपने पीछे छुटती चीजो को देख रही थी, अभी तो सफर शुरु हुआ था, वो कितने लम्बे समय के बाद यू बाहर कही जा रही थी, वरना तो  हमेशा उसके मन में एक डर बस रहता था , वो सुकून से बाहर के नजारे देख रही थी,

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