Gangster love story ( दर्द से मोहब्बत तक का सफर) Ch. 3

Gangster love story (दर्द से मोहब्बत तक का सफर ) - Chapter 3

Posted by SADHNA JAYASWAL श्री राधे 🙏🥰 • May 26, 2025 02:47 PM

भाग - 3 आहूजा की बर्बादी

सार्थक शिवा को आफिस से बाहर लेकर आया

अब आगे

सार्थक जब शिवा को आफिस से बाहर लेकर आया तब तक वरून कार लेकर आ गया,शिवा और सार्थक के  पीछे  शेरा खड़ा था जो शिवा के चहरे के भावो को देख कर समझने की कोशिश कर रहा था कि मींटिग रूम मे क्या हुआ होगा पर शिवि के गुस्से को देख कर वो शांत रहने मे ही अपनी भलाई समने लगा। वरून के कार लाते ही सभी कार में बैठ गये ,सार्थक शिवा को शांत करवाने के लिए बोला

सार्थक - यार शिवा तू उस आहूजा की बातो को ज्यादा मत सोच वो तो चाहता ही है कि तू गुस्से में कुछ गलत कर दे उस कि बातो को तू नजर अंदाज कर

शिवा (गुस्से मे चिल्ला कर) - कैसे.. कैसे नजर अंदाज कर दू तू जानता है कि वो क्या बोलने कि कोशिश कर रहा था वो किस बात को लेकर कर मुझे उकसाने कि कोशिश

कर रहा था

सार्थक - जानता हूँ मैं कि वो क्या बोलना चाहता था पर तू  अपने इस गुस्से को कम कर और उसे सही जगह पर इस्तेमाल कर जिससे कि उस आहूजा की पूरी हस्ती को हम राख कर दे

(सार्थक और शिवा की  बातो को सुन कर वरून और शेरा को सब समझ में आ गया था कि मीटिंग रूम में कया हुआ होगा, दोनों कि सोच पर विराम तब लगा जब उन्हें सार्थक की आवाज़ आई)

सार्थक - अच्छा ये सब छोड़ ये बता कि अपना ये सडा सा फेस लेकर कहा जायेगा आफिस या

शिवा - उस कि बातों को बीच मे ही टोक कर वो वरून से  बोला...  वरून कार आफ़िस ले कर चल

शिवा की बात सुन कर वरून ने कार को आफिस के लिए घुमा दिया इतना बोल कर शिवा ने अपना सिर सीट से टिका लिया और कुछ पुरानी कडवी़ यादो को सोचने लगा उस के चेहरे को देख कर सार्थक मन ही मन सोचने लगा

सार्थक  (मन में ) -  मैं ... मै जानता हू की तू क्या सोच रहा होगा,  तू क्यो अपने आप को इतनी तकलीफ दे रहा है जिस शिवा भाई को पूरी मुम्बई जानती हैं जिसके नाम से उस के दुश्मनो की रूह भी कांप जाती हैं वो अपने उस अतीत की कड़वी यादो को अपने अंदर समेटे बैठा है..... हैं  महादेव आप से मे हमेशा ही यही मागा हैं सिर्फ अपने यार, भाई की तकलीफो को कम करने के अलावा आप से कुछ नहीं  मागा है आप से बस यही दुआ मागता हू की कोई तो ऐसा आये मेरे यार की जिन्दगी में  जिसे फिर से पहले जैसा हसना मुस्कुराना सीखाने , मै अपने यार को फिर से कहते मुस्कुराते देखना चाहता हूँ) सार्थक की  सोच पर विराम वरून ने लगाया

वरून - भाई आफिस आ गये हैं

वरून कि बातों को सुनकर सभी आफिस के अंदर आ गये शिवा को देख कर सभी ने उसे विश किया ,शिवा सभी को इग्नोर कर अपने कैबिन में  आ गया और उसके पीछे पीछे सार्थक , शेरा, वरून भी आ गये  सभी को एक नजर घूर कर शिवा ने शेरा से कहा

शिवा - शेरा मंयक और कार्तिक कहा है, उन्हें एक काम दिया था जो अभी तक नहीं  हुआ है उन्हें फोन कर के यहा  तुरंत बुलाओ ... शेरा जैसे ही फोन करने वाला था उसी वक्त किसी ने डोर नोक किया शिवा ने कम इन कहा तो दो लोग अंदर आए ये मंयक और कार्तिक थे, जो शिवा के लिए काम करते थे ओर उसके बाडीगार्ड के साथ उसकी फैमली भी थे,

शिवा (उन दोनों को देख कर) - मयंक और कार्तिक ने हा में  सिर हिला कर कहा और एक फाइल शिवा की  तरफ बडा दिया , शिवा फाइल को खोल कर पडने लगा और उस के चेहरे पर एक तिरछी मुस्कान थी जिसे देख कर सार्थक बोला

सार्थक - शिवा  क्या है  इस फाइल में जो तू ऐसे मुस्कुरा रहा है ऐसा भी क्या है इस मे मुझे भी दिखा ये कह कर सार्थक ने जैसे जैसे उस फाइल को पढा वो भी खुश हो गया वो खुश हो कर बोला

सार्थक - मतलब अब उस आहूजा की उल्टी गिनती बहुत जल्दी शुरू होने वाली है,

शिवा - हम्म मे जवाब देकर कुछ सोच कर मुस्कुराने लगा उसे मुस्कुराते देख शेरा बोला

शेरा - भाई आप क्या सोच रहे हैं ऐसा क्या है जो आप सोच रहे हैं

शिवा -आहूजा की बर्बादी का खजाना बहुत, जल्दी

आहूजा की पूरी हस्ती को धीरे धीरे खत्म कर दूगा

  शिवा ने मंयक और कार्तिक से कुछ कहा और वो दोनों सर हिला कर चले गये उनके जाने के बाद शिवा कुछ सोच कर एक कालित मुस्कान लिए मुस्कुराये जा रहा था उसे बस कल का इंतजार था

शिवा ओर अहूजा कि दुश्मनी बहुत पूरानी नही थी, किसी कारण की वजह से शिवा ने अहूजा के पिता ओर भाई को मार दिया था, तब अहूजा यहा नहीं रहता था, वो अपना अलग बिजनेस बाहर के देश में चलाता था, लेकिन जब उसे अपने पिता ओर भाई के मौत की खबर मिली , ओर उन्हें मारने वाले के बारे मे पता चला कि उन्हें किसी ओर ने नही बल्कि मुम्बई शहर के सबसे बडे़ बिजनेस मैन ने अपनी आपसी रंजिश की वजह से उसके भाई ओर पिता को मार दिया था ,बस तभी से वो शिवा ओर उसकी गैंग का दुश्मन बन गया था, उसका बस एक ही मकसद था शिवा को हराने का ओर उसे मौत के घाट उतारने का, इसी वजह से वो शिवा को हराने के लिए ओर उसके बिजनेस को डुबाने के लिए हर तरह की कोशिश करता था,फिर चाहे वो कोशिश सही हो या गलत , वो हर हाल में शिवा को मारना चाहता था, ओर ये दुश्मनी समय के साथ साथ ओर बढती रही थी, जो सबसे ज्यादा आहूजा की ओर से निभाई जा रही थी,

ओर शिवा जिसने कभी हारना सीखा नही है वो आहुजा की हर कोशिशों को मिटा देता था, उसे पता था कि आहूजा उससे किस तरह की रंजिश रखता है, ओर उसका मक़सद क्या है, इसके बाद भी शिवा सिर्फ उसे उसके भी चाल में मात देता था,

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