Gangster love story (दर्द से मोहब्बत तक का सफर ) - Chapter 1
कहते है मोहबब्त हर जख्म की दवा होती है और मोहब्बत सजा भी होती है। यह कहानी गैंगस्टरों की दुनिया में एक प्रेम कहानी की पड़ताल करती है, जो दर्द से प्यार तक की यात्रा पर केंद्रित है, जो खतरनाक दुनिया में प्रेम की जटिलताओं को दर्शाती है, तथा एक गैंगस्टर की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है। यह कहानी माफिया के भीतर प्रेम की जटिलताओं की पड़ताल करती है। ओर एक मासूम लड़की के दर्द से भरी जिंदगी को दर्शाती है, किस तरह वो अपने अतित में घटी घटनाओं से डर कर जीवन जी रही है, उसे डर है अपने अतीत में घटी घटनाओं से, जिसकी वजह से खोए हैं उसने कुछ अपनो को, किसी की नफरत ओर धोखे की वजह से, जब वो अपने जीवन में आगे बढ़ती है तो उसकी मुलाकात होती हैं, मुम्बई शहर के गैंगस्टर से, ओर पहली ही मुलाकात में उसे पड़ती है उस गैंगस्टर से थप्पड़, ओर उस घटना के बाद एक गैंग वार में वो लड़की बचाती है उस गैंगस्टर की जान, तो कैसाी होगी इस दोनों की लव स्टोरी , जानने के लिए पढ़ते रहिए, गैंगस्टर लव स्टोरी ( दर्द से मोहब्बत तक का सफर) मेरे यानि साधना जायसवाल के साथ ,
ये कहानी है शिवांश और शिवांगी की है। शिवांश सिंह राजपूत मुम्बई का एक गैंगस्टर । वही शिवांगी एक आम सी लड़की है, जो सिर्फ अपनी दुनिया में खुश रहती थी। उसे कभी किसी से कोई मतलब नहीं रहता था। जहां शिवांश आग है, तो शिवांगी पानी है। दोनों है अलग लेकिन क्या एक होने की ताकत रख पाएंगे? क्या था जो शिवांगी ने शिवांश से शादी के लिए इनकार कर दिया था,
कहते हैं कि मोहब्बत हर दर्द की दवा होता है, चाहे वो दर्द कितना ही गहरा क्यो न हो एक सच्ची और पाक मोहब्बत हर जख्म को भर ही देती है ।
तो चलते हैं कहानी के किरदारो की तरफ
शिवांश सिह राजपूत - मुम्बई शहर का एक ऐसा नाम जो सिर्फ नाम लेने से ही लोगों के पसीने निकल जाते हैं, वैसे तो मुम्बई शहर इनके एक इशारे पर चलती है, ये एक बहुत बड़े बिजनेसमैन है, इन्हे न सिर्फ मुम्बई बल्कि बाहरी देशों में भी ये जाने जाते हैं।
ये एक बिजनेसमैन के साथ - साथ ये एक गैंगस्टार भी है, जहा ये अच्छे लोगों के लिए कुछ भी कर सकते हैं तो वही बुरे लोगों के लिए ये किसी काल से कम नहीं है ,
क्या पुलिस, क्या नेता सब इनके ही इशारो पर चलते हैं
अब बात करते हैं इनके साथ काम करने वाले लोगों की तो
सार्थक सिघानिया - ये शिवांश का बचपन का दोस्त हैं साथ ही बिजनेस पार्टनर , और हर सुख दुःख का साथी बिलकुल जय और विरू की जोड़ी, जहा़ शिवांश एक गुस्सैल और भाव हीन शख्स हैं वही सार्थक हमेशा खुश रहने वाला ओर मस्तमौला लड़का है ।
शेरा ,वरून मयंक कार्तिक - ये शिवांश के दोस्त, Bodyguard सब कुछ है और ये सब शिवांश को शिवा भाई कहते हैं
अब आते हैं कहानी की हीरोइन के पास
शिवांगी - एक अनाथ लड़की जिसके आगे पीछे कोई नहीं है न कोई दोस्त न कोई परिवार।
इस का कारण कहानी के साथ साथ ही पता चलेगा ।
मुम्बई की सड़को पर एक कार तेज रफ्तार के साथ चली जा रही थी (शायद किसी जरूरी काम की वजह से) कार की पीछली सीट पर बैठा एक लड़का जो काफी गुस्से में लग रहा था पर उसके उस गुस्से वाले चेहरे पर भी एक अलग ही आकर्षक था, जो उसकी अलग ही शख्सियत को दर्शा रही थी, उसका चेहरा देख कर ही लग रहा कि वो गुस्से में है,उसका वो खतरनाक ओरा उस गाड़ी में अलग ही कहर ढा रहे थे,
वही उसी लड़के की सीट के बगल में उसी लड़के का दोस्त जिसका नाम सार्थक हैं वो उसे शांत करवा रहा था, लेकिन उस लड़के का गुस्सा वैसे का वैसा ही था, सार्थक उस लड़के को शांत कराने के लिए अजीबो-गरीब हरकतें कर रहा था, जिसकी वेह से उस लडके का ग़ुस्सा उसकी आंखो में उतरने लगा, ओर वो अपनी नीली आंखों से सार्थक को घूरने लगा, उस लड़के की घूरती नजरो को महसूस कर सार्थक झेप गया, ओर मुंह बनाकर इधर उधर देखने लगा, जैसे अपनी झेप मिटाना चाह रहा हो,
वही ड्राइवर के सीट पर उसी लड़के का bodyguard जिसका नाम वरून था वो कार चला रहा था, उसकी हाल उस गाड़ी के ताप मान से गर्म हो गया था, हालांकि की ए.सी चल रहा था, लेकिन उस लड़के का ओरा ऐसा था कि ताप माप अपने आप गर्म होने लगा था, ऐसा उन्हे महसूस होता था, और उसी के साथ वाली सीट पर शेरा जो की उसी लड़के का खास आदमी था, वो बिलकुल चुपचाप बैठा था क्योंकि उस दोनों को दो आँखे बडी़ ही शिद्दत से घूरे जा रही थी। ओर ये महसूस कर शेरा की हालत भी खराब थी, इस लिए वो भी शांत सा बैठा था,
वो लड़का कहता हैं
वरून और कितनी देर लगेगी वहा पहुचने में
वरून - शिवा भाई बस पहुचने ही वाले हैं
सार्थक ( शिवांश से) - शिवा रीलेक्स कर यार अभी वहा पहुँचने में टाईम है तू ज्यादा टेन्शन मत ले सब अच्छा ही होगा वैसे भी सब जानते हैं कि वो प्रोजेक्ट हमें ही मिलेगा तो तू क्यो परेशान हो रहा है
शिवा - परेशान और वो भी मे, मै परेशान होता नही बल्कि लोगों को परेशान कर देता हू ।
सार्थक - तो तू उन दोनों बैचारो ( वरून और शेरा) को क्यो घूर रहा है जैसे आंखो से ही भस्म कर देगा।
शिवा - सैम तू जानता है कि मे क्यो ऐसा कर रहा हु ,कुछ भी हो मै वो प्रोजेक्ट उस आहूजा को नही लेने दूगा
सार्थक - हाँ हाँ मै जानता हू की तुम दोनो एक दूसरे के जानी दुश्मन हो और ये मे क्या पूरी मुम्बई जानती हैं
शिवा -( हम्म में जवाब देता है,) और अपने सिर को सीट से टिका कर बैठ जाता है उस के दिमाग में कुछ तो चल रहा था पर क्या वो तो सिर्फ वही जानता था
थोडी देर बाद
वरून - भाई हम पहुंच गये