Chapter 167
कुबूल है🍁🍁 कुछ रिश्ते मजबूरी में बनते हैं… मगर वक्त उन्हें मोहब्बत में बदल देता है। - Chapter 169
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वकार मिर्जा के घर फरीदा आई हुई थी, और वह अकेली ही आई थी। आजकल उसका वकार में जाकर जहाँ ज्यादा ही आना-जाना, ऐसा नहीं था कि वकार मिर्जा उसकी फितरत नहीं जानता था, बस जब से वकार मिर्जा