Chapter 9
कुबूल है - Chapter 9
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दादा जान ने लगभग विनती के लहजे में कहा, "कबीर, रुक जाओ। आज ही बातें साफ़ कर लेते हैं।" कबीर ने अपना बैग उठाया। उसकी आँखों में थकान और जिद दोनों थीं। "जो आपको करना है