Chapter 10
म्हारी लाडली बहु - Chapter 10
डॉक्टर ईशिता पूरी पेशेवरता के साथ वाणी की चोट की जाँच कर रही थीं। उन्होंने नर्स को आवश्यक उपकरण लाने का निर्देश दिया और बहुत आराम से वाणी के मुड़े हुए पैर को टटोला।
"दर्द कहाँ है, यहाँ?" डॉक्टर ईशिता ने पूछा।
"हाँ... यहीं ज़्यादा है," वाणी ने धीरे से कहा।
जवाब देते हुए भी, वाणी की नज़रें डॉक्टर ईशिता के चेहरे या उनके हाथों पर नहीं थीं। वह बस डॉक्टर ईशिता के सफ़ेद कोट को घूरे ही जा रही थी, मानो वह कोई सपना देख रही हो।
हाँ, वह एक सपना ही था—एक पुराना, गहरा और भयानक सपना।
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