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Chapter 9

म्हारी लाडली बहु - Chapter 9

वीर समझ गया कि इस तर्क-वितर्क से कोई फ़ायदा नहीं होने वाला है। वाणी की अकड़ और ज़िद, उसकी अपनी अकड़ और ज़िद से मेल खाती थी।

"ठीक है! बहस बंद कीजिए!" वीर ने एक आदेशात्मक स्वर में कहा। उसने रामू काका को इशारा किया। "रामू काका, इसकी स्कूटी उठाकर कोने में रखिए। मैं इसे डॉक्टर के पास ले जा रहा हूँ।"

वाणी चौंक गई। "कहाँ ले जा रहे हैं? बिना मेरी मर्ज़ी के आप मुझे कहीं नहीं ले जा सकते!"

वीर ने अब बिलकुल भी बहस नहीं की। उसने धीरे से, लेकिन मज़बूती से वाणी को दोनों हाथों से पकड़ा, बिना उसकी मर्ज़ी जाने।

"देखिए, मैं आपका इलाज करवा रहा हूँ, आपको किडनैप नहीं कर रहा हूँ! और अगर आप ज़िम्मेदार हैं, तो आप अपनी नानी को फ़ोन करके बता सकती हैं। वरना मैं खुद आपके परिवार को बता दूँगा!" वीर ने उसे सहारा देते हुए जीप की तरफ़ बढ़ाना शुरू कर दिया।

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