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Chapter 8

म्हारी लाडली बहु - Chapter 8

उधर, वीर ने मन बनाया कि वह अपने मुख्य खेतों का दौरा करके आएगा। उसे खेतों से लगाव नहीं था, पर गाँव के वारिस के तौर पर यह उसकी ड्यूटी थी। उसने अपने नौकर, रामू काका को आवाज़ लगाई।

वीर ने एक सादी जीप निकाली और ख़ुद ड्राइव करने लगा। रामू काका उसके साथ बैठे थे।

बीरबलपुर की चौड़ी, पर उबड़-खाबड़ पगडंडियों से होती हुई, वीर की जीप गन्ने और सरसों के खेतों के बीच से गुज़र रही थी। वीर के मन में अभी भी तान्या से हुई चोरी-छिपे मुलाकात की बात चल रही थी।।

"रामू काका, इस बार फसल कैसी है?" वीर ने पूछा।

"फसल अच्छी है, छोटे चौधरी! बस आप दिल्ली की बातें छोड़िए और यहाँ ध्यान दीजिए, तो और भी अच्छी हो जाएगी," रामू काका ने स्नेह से जवाब दिया।

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