म्हारी लाडली बहु - Chapter 7
हेलो दोस्तों कैसे है आप सब आशा करती हु की आप सब अच्छे होंगे चलिए आज का अध्याय शुरू करते हैं ....
बीरबलपुर के चौधरी हरपाल सिंह का बेटा, अपनी पैतृक 'वर्दी' में!
तान्या के चेहरे पर तुरंत एक सुकून भरी मुस्कान आ गई, जिसे उसने अपने पल्लू के नीचे छिपा लिया। वीर, जिसे उसने हमेशा दिल्ली के कॉलेज और आधुनिक टी-शर्ट में देखा था, उसे आज अपनी जड़ों के बीच देखकर तान्या को अजीब-सा रोमांच महसूस हुआ। उसकी आँखों में वही विद्रोह था, पर उसके कंधों पर उसकी विरासत का भार भी साफ़ दिख रहा था।
तान्या ने वीर को एक पल के लिए देखा। वह जानती थी कि यह मुलाकात कितनी ख़तरनाक है। यह एक चोरी-छिपे देखा गया सपना था।
वीर ने तान्या को देखा, और उसके चेहरे पर तुरंत वह नरमी आ गई जो केवल तान्या के लिए थी। लेकिन उस नरमी के पीछे का दृढ़ संकल्प और अपनी मर्ज़ी से ज़िंदगी जीने की ज़िद, तान्या को स्पष्ट दिखाई दी।
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