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Chapter 149

वाणी अजय राठी - Chapter 150

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आलोक (गंभीर और प्यार से): “वाणी, सुनो मेरी बात ध्यान से।” “जिसने तुम्हें पाला है, वही तुम्हारे अपने हैं।” “खून से नहीं, रिश्ते दिल से बनते हैं। तुम बताओ अगर तुम्हें यह सच पता नहीं

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