Chapter 90
ज़िंदगी: सफर तकरार से प्यार तक का - Chapter 90
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"यह क्या था जिंदगी??" जिंदगी को वापस जमीन पर सीधा खड़ा करते हुए साहिर ने जिंदगी से पूछा। जिंदगी के तो मानो प्राण हलक में आकर अटक गए। "कुछ नहीं था!! मैं सच कहती हूं, मुझे नहीं पता।"