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Chapter 77

ज़िंदगी: सफर तकरार से प्यार तक का - Chapter 77

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"जब तुम यह बात जानती हो.... कि घर में कोई भी तुम्हारी सूरत देखना नहीं पसंद करता.... तो फिर तुम अपने कमरे में ही क्यों नहीं सीमित रहती?? क्या चाहती हो तुम.... यह हम सब घर छोड़कर चले

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