Chapter 80
ज़िंदगी: सफर तकरार से प्यार तक का - Chapter 80
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"तब क्या सोचा है आप लोगों ने?? प्रतापगढ़ कब से निकलने का सोच रहे हैं??" प्रेम जी ने साहिर की तरफ देखते हुए पूछा। रात के खाने के टेबल पर अर्जुन, साहिर, प्रेम जी और जितेंद्र जी बैठे