My love , My professor - Chapter 24
पाँच साल बाद
पाँच साल बीत चुके थे राज और दिया की शादी को। उनका जीवन ऐसे खिल उठा था, जैसा उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। दिया अब एक सफल व्यवसायी थी—उसका बेकरी-कैफ़े पूरे शहर में मशहूर था। यह सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि एक ऐसी जगह बन चुकी थी जहाँ हर कोई आकर सुकून महसूस करता था। वहाँ की मिठाइयाँ, कॉफ़ी, और सबसे बढ़कर, दिया का अपनापन लोगों को बार-बार खींच लाता था।
तो वहीँ, राज अब भी कॉलेज में प्रोफेसर था, और उसके विद्यार्थी उसे उसकी बुद्धिमत्ता और प्रेरणादायक स्वभाव के लिए बेहद पसंद करते थे। लेकिन उसके जीवन की असली खुशी थी—अपने परिवार के पास हर शाम लौटना।
उनका बेटा, रुद्र, अब पाँच साल का था—शरारतों और जिज्ञासा से भरा हुआ। उसे माँ की बेकरी में मदद करना पसंद था, लेकिन मदद से ज़्यादा वह चुपके से कुकीज़ चुराने में माहिर हो चुका था। दूसरी ओर, उनकी आठ महीने की बेटी, प्रिंसी, उनके घर की रौशनी थी, जिसकी मीठी हँसी पूरे माहौल को संगीतमय बना देती थी।
उस शाम, जब कैफ़े बंद हो चुका था और बच्चे अपने बिस्तर में चैन से सो रहे थे, तब राज और दिया को आखिरकार कुछ पल अकेले बिताने का मौका मिला। वे सोफ़े पर बैठे थे, हल्की रोशनी में उनके चेहरे पर एक सुकून भरी चमक थी।
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